पब्लिक स्वर,धमतरी। खरीफ सीजन से पहले किसानों को समय पर और निर्धारित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए धमतरी जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने कालाबाजारी के खिलाफ सख्त अभियान छेड़ दिया है। जिले के विभिन्न विकासखंडों में की गई जांच के दौरान कई उर्वरक विक्रेताओं द्वारा नियमों का उल्लंघन सामने आया, जिसके बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए तीन प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए और बड़ी मात्रा में खाद जब्त की है।
जानकारी के अनुसार कृषि विभाग की टीम ने मगरलोड, नगरी और कुरूद विकासखंड के उर्वरक विक्रय केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान मगरलोड विकासखंड के करेली छोटी स्थित वंदना खाद भंडार में निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक बेचने और किसानों को कम्प्यूटराइज्ड बिल नहीं देने की शिकायत सही पाई गई। अनियमितता की पुष्टि होने पर प्रशासन ने प्रतिष्ठान का उर्वरक लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही दुकान में मौजूद 859 बोरी रासायनिक उर्वरक जब्त कर लिए गए।
इसी तरह नगरी विकासखंड के बेलरगांव स्थित पवार ट्रेडर्स से 600 बोरी जैविक खाद तथा जय किसान ट्रेडर्स से 100 बोरी जैविक खाद जब्त की गई। दोनों प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर निर्धारित समय में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं कुरूद विकासखंड में चण्डी ट्रेडर्स और किसान ट्रेडर्स की जांच के दौरान POS मशीन में दर्ज स्टॉक और वास्तविक उपलब्ध स्टॉक में अंतर पाया गया। इसके अलावा दोनों दुकानों में मूल्य सूची और उपलब्ध उर्वरक स्टॉक की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं की गई थी। इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए प्रशासन ने दोनों प्रतिष्ठानों के उर्वरक लाइसेंस निलंबित कर दिए।
किसानों के हित में सख्ती
खरीफ सीजन के दौरान खाद की मांग बढ़ने के साथ ही कालाबाजारी और जमाखोरी की आशंकाएं भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में कृषि विभाग की यह कार्रवाई किसानों को निर्धारित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने और कृत्रिम संकट पैदा करने की कोशिशों पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
किसानों से प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने किसानों से उर्वरक खरीदते समय अनिवार्य रूप से पक्का एवं कम्प्यूटराइज्ड बिल लेने की अपील की है। साथ ही यदि कोई विक्रेता निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूलता है, बिल देने से इंकार करता है या किसी प्रकार की अनियमितता करता है, तो इसकी सूचना तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन को देने को कहा गया है। कृषि विभाग की लगातार चल रही इस कार्रवाई से जिले में उर्वरक की कालाबाजारी करने वाले कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है, जबकि किसानों ने प्रशासन की सख्ती का स्वागत किया है।

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