पब्लिक स्वर,रायपुर/भानुप्रतापपुर। छत्तीसगढ़ के पहले रैप सिंगर के रूप में पहचान बनाने वाले लोकप्रिय कलाकार एप्पी राजा (चेतन चांडक) का सोमवार को रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और एम्स में उनका उपचार जारी था। उनके निधन की खबर से भानुप्रतापपुर सहित पूरे प्रदेश के संगीत प्रेमियों और प्रशंसकों में शोक की लहर फैल गई है। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार 16 जून को भानुप्रतापपुर में किया जाएगा।
एप्पी राजा ने छत्तीसगढ़ी रैप संगीत को नई पहचान दिलाई थी। उनका चर्चित गीत "टूरा भोको लोलो" प्रदेश ही नहीं, देशभर में लोकप्रिय हुआ और उन्हें खास पहचान मिली। सोशल मीडिया और यूट्यूब के जरिए लाखों लोगों तक उनकी आवाज पहुंची।
संघर्षों के बीच तय किया सफलता का सफर
कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर निवासी एप्पी राजा का वास्तविक नाम चेतन चांडक था। उनका जन्म वर्ष 1994 में नवागढ़ में हुआ था। उनके माता-पिता मूल रूप से राजस्थान के जैसलमेर के रहने वाले थे, जो बाद में छत्तीसगढ़ आकर बस गए। बचपन के कुछ वर्ष दुर्ग में बिताने के बाद उनका परिवार वर्ष 2002 में भानुप्रतापपुर आ गया।
आर्थिक चुनौतियों के बावजूद एप्पी ने अपने सपनों का पीछा नहीं छोड़ा। कांकेर के एक निजी स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्होंने कक्षा सातवीं में अपना पहला रैप लिखा था। उस समय संसाधनों की कमी के कारण वे अपने गीत रिकॉर्ड नहीं कर पाए, लेकिन उन्होंने लेखन और संगीत के प्रति अपना जुनून जारी रखा।
"टूरा भोको लोलो" से मिली पहचान
साल 2015 में पंजाब की एक म्यूजिक कंपनी ने उनके रैप को पसंद कर उन्हें रिकॉर्डिंग का अवसर दिया। इसके बाद उनका गीत "टूरा भोको लोलो" रिलीज हुआ, जिसने देखते ही देखते लोकप्रियता हासिल कर ली। यह गीत यूट्यूब, फेसबुक और व्हाट्सऐप पर लाखों बार सुना और साझा किया गया। इससे पहले उन्हें वर्ष 2014 में MH-I Channel से भी गाने का अवसर मिला था। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, शहीद भगत सिंह और स्वतंत्रता दिवस जैसे विषयों पर भी प्रेरणादायक रैप गीत तैयार किए थे।
परिवार की जिम्मेदारियों के बीच नहीं छोड़ा सपना
जब एप्पी 11वीं कक्षा में थे, तब उनके पिता को हार्ट अटैक आया, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई। घर चलाने के लिए उनकी मां ने सिलाई का काम शुरू किया, जबकि एप्पी भी रोजगार की तलाश में गुजरात के सूरत गए और एक कपड़े की दुकान में काम किया। हालांकि संगीत के प्रति लगाव उन्हें वापस अपने सपनों की ओर ले आया।
बाद में वे पंजाब पहुंचे, जहां पंजाबी कलाकारों और संगीतकारों का सहयोग मिला। पंजाबी फिल्मों के संगीत निर्देशक सरजीत शानू ने उन्हें अपने स्टूडियो में रहने की जगह दी। वहीं से उन्होंने अपने संगीत सफर को नई दिशा दी और लगातार मेहनत के दम पर पहचान बनाई।
संगीत जगत ने खोया एक प्रतिभाशाली कलाकार
एप्पी राजा ने छत्तीसगढ़ी रैप को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी रचनाओं में स्थानीय बोली, युवाओं की सोच और सामाजिक विषयों की झलक दिखाई देती थी। उनके निधन से छत्तीसगढ़ के संगीत जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है। प्रशंसक सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं और उनके गीतों को साझा कर उनकी यादों को जीवित रख रहे हैं।

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