पब्लिक स्वर,रायपुर। जनगणना 2026-27 के स्वगणना पोर्टल में छत्तीसगढ़ी भाषा को शामिल नहीं किए जाने के विरोध में राज्य में आंदोलन की घोषणा की गई है। छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी, छत्तीसगढ़िया युवा क्रान्ति सेना और महिला क्रान्ति सेना सहित कई संगठनों ने इसे छत्तीसगढ़ी अस्मिता और पहचान का मुद्दा बताते हुए 22 अप्रैल, बुधवार को सुबह 11 बजे कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने का ऐलान किया है।
संगठनों का कहना है कि करोड़ों लोगों द्वारा बोली जाने वाली छत्तीसगढ़ी भाषा को अब तक न तो संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान मिला है और न ही प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित सम्मान। उनका आरोप है कि जनगणना पोर्टल में अन्य भाषाओं को शामिल किया गया है, लेकिन छत्तीसगढ़ी को नजरअंदाज किया गया, जो केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति की उपेक्षा है।
आंदोलनकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ राजनीतिक दलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव के समय छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति की बात की जाती है, लेकिन जब अधिकार और मान्यता की बात आती है तो ठोस पहल नहीं दिखती। उन्होंने मांग की है कि छत्तीसगढ़ी भाषा को तत्काल प्रभाव से संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए और जनगणना सहित सभी सरकारी दस्तावेजों में इसे अलग और सम्मानजनक स्थान दिया जाए।
संगठनों का यह भी कहना है कि छत्तीसगढ़ी का अपना समृद्ध साहित्य, व्याकरण और व्यापक बोलने वाला समाज है, इसलिए इसे प्राथमिक शिक्षा से लेकर प्रशासनिक कामकाज तक लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे आने वाली पीढ़ियों और भाषा के अस्तित्व की लड़ाई बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।

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