पब्लिक स्वर,आरंग। पंचायतों में विकास कार्यों के लिए जारी शासकीय राशि के दुरुपयोग के मामलों पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। रायपुर जिले के आरंग अनुविभाग में वित्तीय अनियमितता और शासकीय धन की वसूली नहीं करने के मामले में पांच पूर्व सरपंचों के खिलाफ गिरफ्तारी और सिविल जेल भेजने का वारंट जारी किया गया है। इन पूर्व सरपंचों से कुल 17 लाख 98 हजार 700 रुपए की लोक एवं शासकीय राशि की वसूली की जानी है। इस कार्रवाई के बाद आरंग और खरोरा क्षेत्र के पंचायत प्रतिनिधियों, सचिवों और जनप्रतिनिधियों में हलचल बढ़ गई है। प्रशासनिक हलकों में इसे पंचायत स्तर पर वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
धारा 92(2) के तहत जारी हुआ आदेश
न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं विहित प्राधिकारी आरंग अभिलाषा पैकरा ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 92(2) के तहत यह आदेश जारी किया है। इस प्रावधान के तहत पंचायत पदाधिकारियों से शासकीय या लोक राशि की वसूली सुनिश्चित करने के लिए सिविल कारावास जैसी कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन के अनुसार संबंधित मामलों में पहले ही वसूली संबंधी आदेश पारित किए जा चुके थे, लेकिन राशि जमा नहीं किए जाने पर अब सख्त कदम उठाया गया है।
किन पूर्व सरपंचों पर हुई कार्रवाई?
न्यायालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार निम्नलिखित पूर्व सरपंचों से राशि की वसूली की जानी है— पूर्व सरपंच ग्राम पंचायत वसूली राशि में खेलूराम साहू बनरसी (आरंग) ₹6,76,700
कुंती कुर्रे अमेठी (आरंग) ₹4,42,000
धरमदास टंडन अकोलीखुर्द (आरंग) ₹3,20,000
दिनेश कोसरिया गुमा (खरोरा) ₹2,82,000
दामिनी भंडारपुरी (खरोरा) ₹80,000 शामिल हैं।
नोटिस के बाद भी नहीं जमा की राशि
सूत्रों के अनुसार सभी संबंधित पूर्व सरपंचों को पहले कारण बताओ नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने और बकाया राशि जमा करने का अवसर दिया गया था। उन्हें यह भी बताया गया था कि राशि जमा नहीं करने की स्थिति में सिविल जेल भेजा जा सकता है। हालांकि, प्रशासनिक रिकॉर्ड के मुताबिक न तो संतोषजनक जवाब प्रस्तुत किया गया और न ही निर्धारित राशि सरकारी खजाने में जमा कराई गई। इसके बाद न्यायालय ने उनके खिलाफ सिविल जेल वारंट जारी करने का निर्णय लिया।
पुलिस को गिरफ्तारी और जेल भेजने के निर्देश
एसडीएम एवं अनुविभागीय दंडाधिकारी आरंग ने आरंग और खरोरा थाना प्रभारियों को निर्देश दिया है कि संबंधित पूर्व सरपंचों को अभिरक्षा में लेकर केंद्रीय जेल रायपुर भेजा जाए। जेल अधीक्षक को जारी आदेश में कहा गया है कि संबंधित व्यक्तियों को अधिकतम 30 दिनों तक अथवा बकाया राशि जमा होने तक सिविल जेल में रखा जाए। यदि वे जेल अवधि के दौरान पूरी राशि जमा कर देते हैं तो उन्हें तत्काल रिहा किया जा सकता है।
पंचायतों में बढ़ सकती है जांच की रफ्तार
एक साथ पांच पूर्व सरपंचों के खिलाफ हुई इस कार्रवाई को पंचायत वित्तीय प्रबंधन के मामलों में बड़ा संदेश माना जा रहा है। प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि जिन पंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें लंबित हैं, वहां भी जांच और वसूली की कार्रवाई तेज हो सकती है। एसडीएम अभिलाषा पैकरा ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्यों के लिए जारी शासकीय राशि जनता की संपत्ति है और उसके दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में अन्य पंचायतों के पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों के खिलाफ भी नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?
पंचायत स्तर पर विकास कार्यों के लिए हर साल करोड़ों रुपये की राशि खर्च की जाती है। ऐसे में धन के दुरुपयोग या गबन के मामलों पर प्रभावी कार्रवाई ग्रामीण शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी मानी जाती है। आरंग में हुई यह कार्रवाई न केवल दोषी पाए गए पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त संदेश है, बल्कि अन्य पंचायत प्रतिनिधियों के लिए भी चेतावनी है कि शासकीय धन के उपयोग में लापरवाही या अनियमितता गंभीर कानूनी परिणाम ला सकती है।

User 1








