रिपोर्ट - राजेश रात्रे
पब्लिक स्वर,धमतरी। सूबे का एक ऐसा शहर जहां बह रही है शराब की नदिया..क्या सुबह क्या शाम...? दिन भर हो रही अवैध शराब की बिक्री। बड़े तो बड़े अब नाबालिगों के हाथों तक पहुंच रही है शराब और गांजे की पुड़िया। नशे में धुत्त है भखारा की भावी पीढ़ी और हाकीम कह रहा सब ठीक ठाक है बस कुछ दिनों की मोहलत देदो...।
आजादी के बाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम से विशेष पहचान रखने वाला भखारा नगर आज अवैध गतिविधियों के लिए मशहूर हो रहा है।अवैध शराब, गांजा, नशीली टैबलेट, जुआ सट्टा के अवैध कारोबार ने नगर की प्रतिष्ठा को धूमिल किया है। जबकि जिम्मेदारों ने इस विषय को कभी गंभीरता से नहीं लिया। यही कारण है कि आज भखारा में अपराध चरम पर है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक भखारा में अवैध शराब की लगातार भारी मात्रा में बिक्री की जा रही है।कोलियरी बाईपास से लेकर वार्ड क्रमांक 3 नवीन बालक शाला के आसपास शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है।यहां नगर के ही कुछ लोग अवैध शराब की बिक्री कर मोटी कमाई कर रहे है। अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों में पुलिस का खौफ तनिक भी नहीं है इसका कारण क्या हो सकता है...? पाठक स्वयं अंदाजा लगाए ...कहीं ये शराब माफिया किसी पुलिस अधिकारी या राजनीतिज्ञ के द्वारा पोषित तो नहीं..!
थाने के महज सौ फिट की दूरी पर गांजे की बिक्री
थाने के बगल में अक्सर ट्रकों और भारी वाहनों का लाइन लगा रहता है। सूत्र बताते है कि इन्हीं गाड़ियों की आड़ में गांजे की बिक्री बड़े पैमाने पर की जाती है। सौ, दो सौ और पांच सौ की पुड़िया नाबालिकों के हाथों में थमा दी जाती है। लिहाजा युवा नशे ने धुत्त होकर अपराध की ओर बढ़ रहे है। इसके अलावा वार्ड क्रमांक 3 में भी गांजा की भारी बिक्री की जाने की खबर है जिस पर पुलिस कार्यवाही नहीं करने की बात भी सूत्र बताते है।
अवैध शराब विक्रेता पर पुलिस का दोहरा चेहरा
यह तो स्पष्ट है कि भखारा नगर में लगातार अवैध शराब की बिक्री हो रही है। पुलिस ने भी कई लोगों के खिलाफ कार्यवाही की है तो कई लोगों को क्लीन चीट भी दी।पुलिस पर आरोप है पुलिस शराब कोचियों को उठती है।खाकी वर्दी का धौंस जमाते हुए छोटे कोचियों को डरा धमका कर पैसे वसूल कर छोटे मोटे धारा लगाकर कार्यवाही कर दिया जाता है। एक आरोपी बताते है कि घर में मेहमान आए हुए थे उन्होंने अपने लिए कुछ बोतल शराब खरीदा था। इस दरम्यान पुलिस आया और उन्हें थाना ले गया।थाने में जाने कर बाद उन्हें एक प्रधान आरक्षक ने आबकारी अधिनियम 34(2) लगाने डरा धमकाकर दस हजार रुपयों की मांग की नहीं तो जेल भेजने की धमकी दी।उन्होंने जेल जाने के डर से उन्हें दस हजार दिए भी के बावजूद उनका आबकारी अधिनियम के तहत उन्हें जेल भेज देने की बात पीड़ित बता रहे है।जबकि एक और अन्य को बड़ी रकम वसूल कर छोड़ने का आरोप पुलिस पर लग रहे है।
वही पीड़ित के द्वारा बताई गई सारी जानकारी पब्लिक स्वर के पास सुरक्षित है। पीड़ित ने जल्द पुलिस अधीक्षक के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत कर घूसखोर प्रधान आरक्षक की शिकायत कर करने की बात कही है।

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