पब्लिक स्वर,अभनपुर/रायपुर। अभनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत तोरला में शासकीय चराई भूमि को कथित रूप से निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज किए जाने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। ग्रामीणों ने इसे राजस्व नियमों के विपरीत बताते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों और लाभान्वित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों की ओर से पूर्व सरपंच शिवेंद्र तारक, केजू राम पटेल सहित अन्य ग्रामीणों ने कलेक्टर रायपुर को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत तोरला के अंतर्गत स्थित खसरा नंबर 1031, रकबा 1.93 हेक्टेयर (लगभग 4 एकड़ 82 डिसमिल) भूमि वर्ष 1999-2000 में शासकीय चराई भूमि के रूप में दर्ज थी। वर्ष 2004-05 के राजस्व अभिलेखों में भी उक्त भूमि का रिकॉर्ड चराई मद में दर्ज होना बताया गया है।
वर्ष 2006 में दर्ज हुए निजी नाम, उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2006 में तत्कालीन तहसील कार्यालय गोबरा-नयापारा में पदस्थ अधिकारियों के हस्ताक्षर से उक्त भूमि के लगभग 2 एकड़ 20 डिसमिल हिस्से का बंटवारा कर उसे बशीलाल, रामकुमार, राजेश, चंदन सहित कुछ अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि चराई भूमि गांव की सार्वजनिक संपत्ति होती है, जिसका उपयोग पशुओं के चराई क्षेत्र के रूप में किया जाता है। ऐसी भूमि को निजी स्वामित्व में दर्ज किया जाना गंभीर अनियमितता और राजस्व नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। इसी वजह से पूरे मामले की वैधता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
डिजिटल रिकॉर्ड में दुरुस्ती से बढ़ा संदेह
मामले में एक नया मोड़ तब आया जब ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 21 जनवरी 2024 को डिजिटल रिकॉर्ड दुरुस्ती के दौरान संबंधित व्यक्तियों के नामों को पुनः डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से दर्ज किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 17 वर्षों बाद हुई इस प्रक्रिया ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि यह जांच की जाए कि डिजिटल रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया किस आधार पर और किन दस्तावेजों के आधार पर पूरी की गई।
विशेष ग्राम सभा में पारित हुआ प्रस्ताव
विवाद बढ़ने के बाद ग्राम पंचायत तोरला में सरपंच संजीव गोस्वामी की अध्यक्षता में विशेष ग्राम सभा आयोजित की गई। ग्राम सभा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर संबंधित भूमि को पुनः शासकीय चराई भूमि के रूप में दर्ज करने की मांग की।
साथ ही पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
प्रशासन और पुलिस को सौंपा ज्ञापन
ग्रामीणों ने इस संबंध में कलेक्टर रायपुर, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अभनपुर, तहसीलदार गोबरा-नयापारा तथा थाना नवापारा को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में मामले की निष्पक्ष जांच, राजस्व अभिलेखों की समीक्षा तथा यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित अधिकारियों एवं लाभान्वित व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।
ग्रामीणों की चेतावनी
पूर्व सरपंच शिवेंद्र तारक एवं अन्य ग्रामीणों का कहना है कि चराई भूमि गांव की सामुदायिक संपत्ति है और इसका संरक्षण प्रशासन की जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि यदि मामले में समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई तो ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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