पब्लिक स्वर,गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। एक तरफ भीषण गर्मी में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ गौरेला नगरपालिका की लापरवाही से हजारों लीटर शुद्ध पेयजल नालियों में बह गया। मामला गौरेला नगरपालिका के वार्ड क्रमांक 03 का है, जहां आधी रात के बाद मुख्य पानी टंकी ओवरफ्लो हो गई और घंटों तक पानी झरने की तरह बहता रहा।
स्थानीय लोगों के अनुसार, टंकी पूरी भर जाने के बाद भी समय पर मोटर बंद नहीं की गई। पानी लगातार सड़कों और नालियों में बहता रहा, लेकिन जिम्मेदार कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचे। गर्मी के मौसम में जब शहर के कई इलाकों में जल संकट गहराता जा रहा है, तब इस तरह की लापरवाही ने नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि रात के समय टंकी से गिरता पानी किसी कृत्रिम झरने जैसा दिखाई दे रहा था। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते वाटर ऑपरेटर पंप बंद कर देता तो हजारों लीटर पानी बचाया जा सकता था। यह वही टंकी है, जहां से नगर के अधिकांश हिस्सों में पेयजल सप्लाई की जाती है।
पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी कई बार टंकी ओवरफ्लो होने से बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद हो चुका है। बावजूद इसके नगरपालिका ने अब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की। लोगों ने सवाल उठाया कि जब जल संरक्षण को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, तब खुद जिम्मेदार विभाग ही पानी बचाने को गंभीरता से नहीं ले रहा।
तकनीकी निगरानी की कमी उजागर
विशेषज्ञों के अनुसार, पानी टंकियों में ऑटोमैटिक सेंसर या अलार्म सिस्टम लगाए जाएं तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है। कई नगर निकायों में अब ऑटो कट सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है, जिससे टंकी भरते ही मोटर स्वतः बंद हो जाती है। गौरेला में ऐसी तकनीकी व्यवस्था नहीं होने या उसके सही संचालन नहीं होने से बार-बार पानी की बर्बादी हो रही है।
लोगों में नाराजगी
घटना के बाद वार्डवासियों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जहां एक ओर नागरिकों को पानी बचाने की सीख दी जाती है, वहीं दूसरी ओर सरकारी तंत्र की लापरवाही से हजारों लीटर पानी यूं ही बहा दिया जाता है। नागरिकों ने दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई और जल प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था की मांग की है।

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