बस्तर में माओवादियों को बड़ा झटका: अबूझमाड़-महाराष्ट्र सीमा पर 1.01 करोड़ कैश समेत भारी हथियारों का जखीरा बरामद



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पब्लिक स्वर,नारायणपुर। बस्तर में माओवादी नेटवर्क के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान लगातार असर दिखा रहा है। अबूझमाड़ और महाराष्ट्र सीमा क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने माओवादियों के एक बड़े डंप का खुलासा करते हुए करीब 1 करोड़ 1 लाख रुपये नकद, अत्याधुनिक हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की है। इस कार्रवाई को हाल के वर्षों में नक्सल विरोधी अभियानों की बड़ी सफलताओं में माना जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, सुरक्षाबल इलाके में सर्चिंग ऑपरेशन चला रहे थे। इसी दौरान जवानों को जंगल के भीतर संदिग्ध स्थान पर छिपाकर रखा गया माओवादी डंप मिला। तलाशी लेने पर वहां से बड़ी मात्रा में हथियार, नकदी और विस्फोटक सामग्री बरामद हुई।

AK-47 से लेकर BGL रॉकेट तक मिले

बरामद सामग्री में 3 AK-47 राइफल, 3 SLR, 2 थ्री-नॉट-थ्री राइफल, BGL रॉकेट, इलेक्ट्रॉनिक बम डिवाइस
और अन्य नक्सली सामग्री शामिल है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह डंप माओवादी संगठन की बड़ी गतिविधियों और लॉजिस्टिक सप्लाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। नकदी की इतनी बड़ी बरामदगी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि संगठन अब भी आर्थिक संसाधनों को सुरक्षित रखने की कोशिश में जुटा हुआ था।

दो साल में 265 हथियार जब्त

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में बस्तर क्षेत्र में चलाए गए अभियानों के दौरान अब तक 265 हथियार बरामद किए जा चुके हैं। लगातार हो रही बरामदगी से साफ है कि सुरक्षाबल अब माओवादियों के पुराने ठिकानों, बंकरों और सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचने में सफल हो रहे हैं।

जमीन के भीतर छिपा रखा था बंकर

इससे पहले सोमवार को भी पीडिया पुलिस कैंप और गंगालूर पुलिस की संयुक्त टीम ने सर्चिंग अभियान के दौरान एक बड़ा माओवादी डंप बरामद किया था। बताया गया कि माओवादियों ने बंकर को जमीन के भीतर बेहद गोपनीय तरीके से तैयार किया था।

इस कार्रवाई में पुलिस को भारी मात्रा में विस्फोटक, हथियार, BGL लॉन्चर, 29 BGL सेल, कॉर्डेक्स वायर, जनरेटर, सोलर प्लेट, बैटरी और वेल्डिंग मशीन जैसी सामग्री मिली थी। सुरक्षाबलों का मानना है कि इन संसाधनों का उपयोग लंबे समय तक जंगलों में ऑपरेशन चलाने और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए किया जाता था।

कमजोर पड़ता माओवादी नेटवर्क

विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार हो रही कार्रवाई और बड़े डंपों की बरामदगी यह संकेत देती है कि बस्तर में माओवादी संगठन का नेटवर्क कमजोर पड़ रहा है। पहले जिन इलाकों को माओवादियों का सुरक्षित गढ़ माना जाता था, अब वहां सुरक्षा बल गहराई तक पहुंच बना रहे हैं। फिलहाल पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है और आशंका जताई जा रही है कि आसपास के जंगलों में और भी छिपे हुए डंप या बंकर मिल सकते हैं।



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