निगम में देवी-देवताओं पर कथित टिप्पणी के बाद आयुक्त के पीए से मारपीट



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पब्लिक स्वर,दुर्ग। हिंदू देवी-देवताओं पर कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर शुक्रवार को दुर्ग नगर निगम कार्यालय में बड़ा हंगामा खड़ा हो गया। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यकर्ताओं ने नगर निगम आयुक्त के पीए के रूप में कार्यरत गौतम साहू के साथ निगम परिसर में मारपीट कर दी। घटना के बाद कार्यालय परिसर में तनाव की स्थिति बन गई और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

व्हाट्सएप मैसेज से शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार, गौतम साहू पर आरोप है कि उन्होंने एक महिला कर्मचारी को व्हाट्सएप के जरिए हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी भेजी थी। मैसेज की जानकारी सामने आने के बाद हिंदू संगठनों में नाराजगी फैल गई। दोपहर में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में नगर निगम कार्यालय पहुंचे और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इसी दौरान निगम परिसर में बने मंदिर के पास गौतम साहू को घेर लिया गया और उनके साथ धक्का-मुक्की व मारपीट की गई। घटना में उनके कपड़े फट गए और पैर व कनपटी के पास चोटें आईं। बाद में उन्हें जिला अस्पताल ले जाकर उपचार कराया गया।

पुलिस ने संभाला मोर्चा

स्थिति बिगड़ते देख निगम कर्मचारियों ने बीच-बचाव किया और कार्यकर्ताओं से कानून हाथ में नहीं लेने की अपील की। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। इसके बाद गौतम साहू को सुरक्षा के बीच थाना ले जाया गया, जहां उनसे पूछताछ की गई।

पुलिस ने मामले में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 के तहत अपराध दर्ज किया है। हालांकि, पुलिस मारपीट की घटना को लेकर भी जांच कर रही है और निगम परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

जिम्मेदार पद पर था आरोपी कर्मचारी

गौतम साहू नगर निगम दुर्ग में प्लेसमेंट कर्मचारी के तौर पर पदस्थ हैं और वर्तमान में निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल के पीए का काम देख रहे थे। यह पद प्रशासनिक दृष्टि से काफी संवेदनशील और जिम्मेदारी वाला माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक, पहले यह जिम्मेदारी नियमित कर्मचारियों को दी जाती रही है।

सवालों के घेरे में सोशल मीडिया व्यवहार और भीड़ की प्रतिक्रिया

घटना ने दो बड़े सवाल खड़े किए हैं। पहला, सरकारी कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों की सोशल मीडिया गतिविधियों और आचरण को लेकर जवाबदेही कितनी सुनिश्चित है। दूसरा, किसी कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर कानून प्रक्रिया से पहले भीड़ द्वारा हिंसक प्रतिक्रिया क्या व्यवस्था के लिए चुनौती बनती जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री तेजी से तनाव पैदा करती है। ऐसे मामलों में प्रशासनिक सतर्कता और कानूनी कार्रवाई दोनों की भूमिका अहम हो जाती है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और दोनों पक्षों से पूछताछ की जा रही है।



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