पब्लिक स्वर,छुरा/गरियाबंद। गरियाबंद जिले के विकासखंड छुरा अंतर्गत आमानाला जलाशय के शीर्ष कार्य और नहरों के रिमॉडलिंग कार्य में जल संसाधन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास के नाम पर आदिवासियों को ठगा जा रहा है। करोड़ों की प्रशासकीय स्वीकृति के बावजूद धरातल पर काम की गुणवत्ता शून्य है।
नियम के उलट निर्माण
ग्रामीणों ने मौके पर मीडिया को बताया कि मुख्य नहर और शाखा नहरों में की जा रही सीमेंट कंक्रीट लाइनिंग की मोटाई मानकों के विपरीत है। जहां भारी मजबूती की आवश्यकता है, वहां महज 2 से 2.5 इंच की पतली परत बिछाकर काम निपटाया जा रहा है। जिस कारण नहरों की उखड़ने का खतरा पैदा हो गया है।
अधिकारियों की मिलीभगत: दफ्तर में बैठकर हुआ मूल्यांकन?
क्षेत्रीय आदिवासियों और किसानों में विभाग के प्रति भारी आक्रोश है। उनका सीधा आरोप है कि जल संसाधन विभाग के संबंधित अभियंता बिना कार्यस्थल का दौरा किए, दफ्तर में बैठकर ही मूल्यांकन और सत्यापन कर रहे हैं। बिना भौतिक सत्यापन के भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना विभाग की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह आदिवासियों के विकास के नाम पर केवल सरकारी पैसे की बंदरबांट है।
जनप्रतिनिधि की चुप्पी पर सवाल
क्षेत्रीय विधायक रोहित साहू, जो लगातार क्षेत्र के विकास के दावे करते हैं, इस बड़े भ्रष्टाचार पर मौन साधे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नहरों की बदहाली और घटिया निर्माण की शिकायत के बावजूद विधायक की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाना संदेह पैदा करता है।

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