पब्लिक स्वर,अभनपुर/जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा जिले के चांपा स्थित Prakash Industries Limited के प्लांट में शुक्रवार को एक बार फिर बड़ा औद्योगिक हादसा हो गया। प्लांट की फर्नेस (भट्टी) में अचानक हुए तेज विस्फोट से पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के इलाकों तक दहशत फैल गई और लोग घरों से बाहर निकल आए।
घायलों की संख्या स्पष्ट नहीं, राहत-बचाव में जुटी टीमें
हादसे में कई मजदूरों के घायल होने की सूचना है, हालांकि देर शाम तक घायलों की आधिकारिक संख्या सामने नहीं आई थी। घटना के तुरंत बाद प्लांट के भीतर 4 से 5 एम्बुलेंस जाती देखी गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घायलों को जल्दबाजी में बाहर निकालकर नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। प्लांट के बाहर परिजनों की भीड़ जमा हो गई। कोई फोन पर अपनों की जानकारी लेने में जुटा रहा, तो कोई बदहवास हालत में गेट के बाहर इंतजार करता दिखा। मौके पर स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण बनी रही।
पहले भी हो चुके हैं जानलेवा हादसे
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब इस प्लांट में इस तरह का विस्फोट हुआ हो। करीब एक साल पहले भी फर्नेस ब्लास्ट की एक बड़ी घटना में 13 लोगों की मौत हो चुकी थी, जिसमें एक जीएम स्तर का अधिकारी भी शामिल था। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं प्लांट के सुरक्षा मानकों और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
इंटक ने कहा—“यह हादसा नहीं, हत्या है”
घटना पर भारतीय राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के प्रदेश अध्यक्ष टिकेंद्र सिंह ठाकुर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “यह हादसा नहीं, बल्कि हत्या है। बार-बार हो रहे विस्फोट यह साबित करते हैं कि प्रबंधन मजदूरों की जान से खेल रहा है। जिनकी जिम्मेदारी सुरक्षा की है, वही लापरवाही बरत रहे हैं।”
उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, घायलों के समुचित इलाज और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि जब तक सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित नहीं होता, तब तक प्लांट का संचालन बंद किया जाना चाहिए।
सुरक्षा बनाम उत्पादन: पुराना टकराव फिर सामने
यह हादसा एक बार फिर उस पुराने सवाल को सामने लाता है—क्या औद्योगिक उत्पादन के दबाव में सुरक्षा मानकों से समझौता किया जा रहा है?
जानकारों का मानना है कि फर्नेस संचालन में तकनीकी निगरानी, नियमित मेंटेनेंस और सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन बेहद जरूरी होता है। इनमें जरा सी चूक भी बड़े विस्फोट का कारण बन सकती है।
स्थानीय मजदूरों पर सबसे ज्यादा असर
प्लांट में काम करने वाले अधिकांश मजदूर आसपास के ग्रामीण इलाकों से आते हैं। उनके लिए यह रोजगार जीवनयापन का मुख्य साधन है। लेकिन बार-बार हो रहे हादसे यह संकेत देते हैं कि उनकी सुरक्षा अब भी सुनिश्चित नहीं है।
जांच और जवाबदेही पर निगाह
घटना के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों की जांच की संभावना है। अब देखना होगा कि इस बार जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाती है या वास्तव में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है और सुरक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार किए जाते हैं।

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