नहर परियोजना में 7.5 करोड़ की गुणवत्ता पर सवाल, मानक से आधी पाई गई लाइनिंग



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पब्लिक स्वर,डोंगरगढ़। डोंगरगढ़ क्षेत्र में देवकट्टा जलाशय से बेलगांव तक निर्मित लगभग 7.5 करोड़ रुपये की नहर परियोजना गंभीर तकनीकी खामियों को लेकर विवादों में आ गई है। हाल ही में हुए विभागीय निरीक्षण के दौरान नहर लाइनिंग की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं, जिससे निर्माण कार्य की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था दोनों पर उंगली उठ रही है।

निरीक्षण रिपोर्ट और मौके पर मिले हालात के अनुसार नहर की लाइनिंग, जिसे मानक रूप से 4 इंच मोटा होना चाहिए था, कई स्थानों पर 2 इंच से भी कम पाई गई है। इस कमी के कारण कंक्रीट की मजबूती प्रभावित हुई है और निर्माण कार्य शुरू हुए महज डेढ़ साल के भीतर ही कई हिस्सों में लाइनिंग उखड़ने लगी है। कई जगहों पर बेस लेयर खुल जाने से नहर की संरचना कमजोर हो चुकी है और उसका स्वरूप एक क्षतिग्रस्त नाली जैसा दिखाई देने लगा है।

इसके साथ ही नहर में जगह-जगह सिल्ट और मलबा जमा होने से जल प्रवाह बाधित हो रहा है, जिससे परियोजना की मूल उपयोगिता पर भी असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति न केवल निर्माण गुणवत्ता में कमी को दर्शाती है, बल्कि रखरखाव और निगरानी व्यवस्था की भी विफलता की ओर संकेत करती है।

स्थिति केवल मुख्य नहर तक सीमित नहीं है। परियोजना से जुड़ी माइनर नहरों में भी निर्माण संबंधी गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। कई स्थानों पर किनारों की फिलिंग अधूरी पाई गई है, जबकि पर्याप्त कंपैक्शन न होने के कारण बरसात के दौरान कटाव का खतरा बढ़ गया है। कुछ हिस्सों में कंक्रीट की पतली परतें उखड़ती दिखाई दे रही हैं, जिससे निर्माण में घटिया सामग्री और तकनीकी मानकों की अनदेखी की आशंका और मजबूत हो गई है।

विभागीय अधिकारियों ने बुधवार को मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान सामने आई खामियों को गंभीर मानते हुए ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाई गई और दोषपूर्ण हिस्सों में तत्काल सुधार कार्य के निर्देश दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार मरम्मत कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है।

इस बीच किसानों और स्थानीय ग्रामीणों ने परियोजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप पूरा नहीं किया गया, फिर भी संबंधित भुगतान प्रक्रिया पूरी कर दी गई। ग्रामीणों का दावा है कि यदि माप पुस्तिका और भुगतान रिकॉर्ड की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जाए, तो व्यापक अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते गुणवत्ता सुधार और स्थायी मरम्मत नहीं की गई, तो आगामी वर्षा ऋतु में नहर की लाइनिंग के बड़े हिस्से के बह जाने की आशंका है, जिससे क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।



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