निजी स्कूलों को गर्मी की छुट्टियों में स्कूल खोलना पड़ा भारी, कार्रवाई के निर्देश



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पब्लिक स्वर,रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी के बीच निजी स्कूलों द्वारा ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान भी कक्षाएं संचालित किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राज्य शासन द्वारा छुट्टियां घोषित किए जाने के बावजूद कई निजी स्कूल बच्चों को स्कूल आने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इस पर अब लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश के सभी संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।

लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि राज्य शासन ने पहले जारी आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए प्रदेश के सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त, गैर अनुदान प्राप्त और अशासकीय स्कूलों के लिए 20 अप्रैल 2026 से 15 जून 2026 तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया है। इसके बावजूद कई निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा विभिन्न कारणों का हवाला देकर नियमित रूप से कक्षाएं संचालित की जा रही हैं, जो शासन के आदेश का सीधा उल्लंघन माना गया है।

हाईकोर्ट ने भी लिया संज्ञान

मामला अब केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहा। बिलासपुर हाईकोर्ट में दायर डब्ल्यू.पी.पी.आई.एल. 22/2016 की सुनवाई के दौरान भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया। अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि प्रदेश के कुछ निजी स्कूल भीषण गर्मी में भी छात्रों को स्कूल बुला रहे हैं और पढ़ाई के लिए बाध्य कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने इसे बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय माना। खासकर अप्रैल-मई की तेज गर्मी में छोटे बच्चों का लगातार स्कूल आना स्वास्थ्य जोखिम बढ़ाने वाला माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस मौसम में लू, डिहाइड्रेशन और थकावट जैसी समस्याओं का खतरा सबसे ज्यादा बच्चों पर होता है।

विभाग ने मांगी कार्रवाई रिपोर्ट

लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि यदि उनके जिले में कोई भी अशासकीय शिक्षण संस्था ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान कक्षाओं का संचालन करती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी संचालनालय को भेजने को कहा गया है।

इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग की टीमों द्वारा निजी स्कूलों की निगरानी बढ़ाए जाने की संभावना है। माना जा रहा है कि नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों पर नोटिस, मान्यता संबंधी कार्रवाई या अन्य प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं।

सवालों के घेरे में निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली

यह मामला एक बार फिर निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। कई अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल “एक्स्ट्रा क्लास”, “समर कैंप”, “कोर्स कम्प्लीशन” और “एडमिशन तैयारी” के नाम पर बच्चों को बुला रहे हैं। कई जगहों पर अभिभावकों पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।


प्रशासन के सामने चुनौती

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला स्तर पर वास्तव में सख्ती दिखाई जाएगी या फिर आदेश केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा। क्योंकि हर साल छुट्टियों के दौरान निजी स्कूलों द्वारा नियमों की अनदेखी के आरोप सामने आते रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के मामले बेहद कम देखने को मिले हैं। इस बार हाईकोर्ट के संज्ञान और DPI के स्पष्ट निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग पर प्रभावी कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।



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