पब्लिक स्वर,बिलासपुर। NEET पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस और एनएसयूआई ने गुरुवार को केंद्रीय राज्य मंत्री एवं बिलासपुर सांसद तोखन साहू के निवास का घेराव कर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध जताते हुए निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश के बीच प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया तथा कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। कुछ कार्यकर्ताओं को मामूली चोटें आने की भी जानकारी सामने आई है।
हालांकि, प्रदर्शन के बाद इसकी शैली और स्वरूप को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मोबाइल फोन से वीडियो और फोटो बनाते नजर आए। सोशल मीडिया के लिए रील और वीडियो तैयार करने की होड़ भी दिखाई दी, जिसे लेकर लोगों के बीच विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया गतिविधियां मुद्दे से ज्यादा प्रमुख नजर आईं। वहीं, कुछ प्रदर्शनकारियों से बातचीत में यह भी सामने आया कि उन्हें आंदोलन के मूल मुद्दे की पूरी जानकारी नहीं थी और वे संगठन के आह्वान पर कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
इस बीच, यह भी चर्चा का विषय बना रहा कि NEET परीक्षा से सीधे जुड़े छात्र, शिक्षाविद् या कोचिंग संस्थानों की भागीदारी अपेक्षाकृत कम दिखाई दी। इससे आंदोलन की प्रभावशीलता और उसके वास्तविक उद्देश्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल दौर में सोशल मीडिया किसी भी आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, लेकिन मूल मुद्दों को केंद्र में बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। NEET पेपर लीक जैसा विषय लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा है और ऐसे मुद्दों पर होने वाले आंदोलनों से लोगों को ठोस संदेश और समाधान की अपेक्षा रहती है। फिलहाल, प्रदर्शन के बाद शहर में NEET पेपर लीक के साथ-साथ आंदोलनों में बढ़ती सोशल मीडिया सक्रियता को लेकर भी बहस तेज हो गई है।

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