पब्लिक स्वर,रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। नया रायपुर स्थित नंदनवन जू एवं जंगल सफारी में अब पर्यटकों को अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों और नई जल पर्यटन सुविधाओं का अनुभव मिलेगा। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने शुक्रवार को इन नई सेवाओं का शुभारंभ किया।
यह पहल केवल पर्यटन सुविधाओं के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे प्रदेश में “ग्रीन टूरिज्म मॉडल” के रूप में देखा जा रहा है। खास बात यह है कि वन विभाग ने इस परियोजना में पहली बार राजस्व साझेदारी (Revenue Sharing Model) अपनाया है, जिससे सरकारी खर्च कम होगा और निजी निवेश के जरिए आधुनिक सुविधाएं तेजी से विकसित की जा सकेंगी।
ई-व्हीकल्स से मिलेगा शांत और प्रदूषण मुक्त सफारी अनुभव
जंगल सफारी में पर्यटकों की आवाजाही के लिए 7 नई इलेक्ट्रिक बसें और 5 इलेक्ट्रिक जिप्सी शामिल की गई हैं। विभाग का दावा है कि भविष्य में इनकी संख्या और बढ़ाई जाएगी। इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से डीजल-पेट्रोल आधारित वाहनों पर निर्भरता घटेगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और जंगल का प्राकृतिक वातावरण शांत बना रहेगा।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पारंपरिक वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहन कम शोर करते हैं, जिससे वन्यजीवों पर नकारात्मक प्रभाव भी कम पड़ेगा। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ग्रीन एनर्जी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विजन के अनुरूप मानी जा रही है।
जंगल सफारी में अब मिलेगा वाटर टूरिज्म का रोमांच
पर्यटकों के अनुभव को और आकर्षक बनाने के लिए जंगल सफारी में जल पर्यटन गतिविधियों की भी शुरुआत की गई है। अब यहां पॉटून बोट और बांस राफ्ट्स की सुविधा उपलब्ध होगी। विभाग भविष्य में कायकिंग और वाटर साइकिल जैसी एडवेंचर गतिविधियां शुरू करने की तैयारी भी कर रहा है।
स्थानीय कला और हस्तशिल्प को मिलेगा नया बाजार
सफारी परिसर में एक विशेष शोवेनियर शॉप भी तैयार की गई है, जहां पर्यटक छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला, बस्तर आर्ट और स्थानीय हस्तशिल्प से जुड़ी वस्तुएं खरीद सकेंगे। इससे स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को नया बाजार मिलने की उम्मीद है।
युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर
इस परियोजना के जरिए 15 से 20 स्थानीय युवाओं, विशेषकर महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा निजी क्षेत्र द्वारा किए जा रहे निवेश से आसपास के क्षेत्रों में छोटे व्यवसाय, परिवहन, फूड सर्विस और हस्तशिल्प कारोबार को भी लाभ मिल सकता है।
छत्तीसगढ़ में इको-टूरिज्म का नया मॉडल
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में प्रदेश के अन्य पर्यटन स्थलों — जैसे चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर वैली और अचानकमार — में भी इसी तर्ज पर ईको-फ्रेंडली पर्यटन सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। नंदनवन जू एवं जंगल सफारी में शुरू हुई यह पहल संकेत देती है कि छत्तीसगढ़ अब पारंपरिक पर्यटन से आगे बढ़कर आधुनिक, टिकाऊ और पर्यावरण केंद्रित पर्यटन मॉडल की ओर कदम बढ़ा रहा है।

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