सुशासन तिहार में दर्ज शिकायत का दिखा असर, अवैध रेत डंपिंग पर चला प्रशासनिक बुलडोजर



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पब्लिक स्वर,रायपुर। रायपुर जिले के आरंग क्षेत्र स्थित कुटेला गांव में ऐतिहासिक तालाब की जमीन पर किए गए कथित अवैध रेत भंडारण के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। खनिज और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने समोदा, कुरूद, मोहमेला और कुटेला क्षेत्रों में जांच अभियान चलाते हुए भारी मात्रा में अवैध रूप से डंप की गई रेत जब्त की है। साथ ही अवैध परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे वाहनों को भी जब्त कर संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।

शिकायत और खबर के बाद हरकत में आया प्रशासन

कुटेला गांव में तालाब और शासकीय भूमि पर बड़े पैमाने पर रेत भंडारण किए जाने की शिकायतें सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। उप संचालक खनिज प्रशासन राजेश मालवे के निर्देश पर गठित संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। कार्रवाई दल में सहायक खनिज अधिकारी उमेश भार्गव, राजस्व विभाग के नायब तहसीलदार गजानंद सिदार, स्थानीय पटवारी, कोटवार सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे। जांच के दौरान ग्राम सरपंच कमलेश्वरी संतोष जलक्षत्री, पंचगण और बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे।

तालाब और शासकीय भूमि पर मिला अवैध रेत भंडारण

संयुक्त टीम ने कुटेला-चिखली मुख्य मार्ग के किनारे निरीक्षण किया, जहां शासकीय भूमि और प्रस्तावित तालाब क्षेत्र में बड़ी मात्रा में रेत का अवैध भंडारण पाया गया। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद रेत को जब्त करते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी। प्राथमिक जांच में सामने आया कि रेत के डंप तक पहुंचने के लिए भारी वाहनों के आवागमन हेतु एक अस्थायी मार्ग भी तैयार किया गया था। प्रशासन ने जेसीबी की मदद से इस मार्ग को हटवा दिया, ताकि भविष्य में वहां दोबारा अवैध भंडारण न किया जा सके।

तीन वाहन जब्त, आरोपियों को नोटिस

अधिकारियों ने अवैध रेत परिवहन में संलिप्त तीन भारी वाहनों को भी जब्त किया है। सुरक्षा कारणों से इन वाहनों को आरंग थाना परिसर में रखा गया है। मामले में लौह चंद्राकर, पवन चंद्राकर, हेमंत चंद्राकर और रघु चंद्राकर को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

खान एवं खनिज अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई

खनिज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पूरे प्रकरण में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित लोगों पर जुर्माना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

ग्रामीणों ने जताई संतुष्टि, तालाब बहाली की मांग

कार्रवाई के बाद ग्रामीणों ने प्रशासनिक हस्तक्षेप का स्वागत किया है। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब क्षेत्र में अवैध गतिविधियों को रोकना जरूरी था, लेकिन स्थायी समाधान तभी माना जाएगा जब तालाब को उसके मूल स्वरूप में पूरी तरह बहाल किया जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की नियमित निगरानी की जाए और भविष्य में शासकीय भूमि एवं जलस्रोतों पर अतिक्रमण या अवैध खनन जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।



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