एक महीने में उखड़ी 36 लाख की गौरव पथ सड़क, ग्रामीणों ने ठेकेदार और अफसरों पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप



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पब्लिक स्वर,बिलासपुर। बिलासपुर जिले के तखतपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत नेवरा में मुख्यमंत्री गौरव पथ योजना के तहत बनाई गई सीसी रोड निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 36 लाख रुपए की लागत से तैयार की गई 450 मीटर लंबी सड़क महज एक महीने के भीतर ही उखड़ने लगी है। सड़क से गिट्टियां बाहर निकल रही हैं और कई जगहों पर सीमेंट की जगह रेत की परत साफ दिखाई दे रही है। मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों ने सड़क की खराब स्थिति का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया है और बिलासपुर कलेक्टर से शिकायत कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

निर्माण पूरा होते ही खुलने लगी गुणवत्ता की पोल

बिलासपुर-कोटा मुख्य मार्ग स्थित नेवरा गांव में पिछले चार-पांच महीनों से गौरव पथ योजना के तहत सड़क निर्माण कार्य चल रहा था। ग्रामीणों के मुताबिक मार्च महीने में निर्माण पूरा हुआ, लेकिन सड़क की हालत देखकर अब निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर सामान्य वाहन चलने से ही गिट्टियां बाहर निकलने लगी हैं। कई हिस्सों में सीसी रोड की ऊपरी परत टूट रही है, जिससे निर्माण में घटिया सामग्री इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

“सीमेंट कम, रेत ज्यादा” : ग्रामीणों का आरोप

स्थानीय निवासी बिहारी सिंह टोडर सहित अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि सड़क में सीमेंट की मात्रा कम और रेत अधिक उपयोग की गई, जिसके कारण सड़क शुरुआती गर्मी भी नहीं झेल पा रही है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण के दौरान जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई। सड़क किनारे नालियों का निर्माण नहीं होने से बारिश के मौसम में सड़क के और तेजी से खराब होने की आशंका जताई जा रही है।

योजना विकास की या भ्रष्टाचार की?

गांव के लोगों का कहना है कि शासन की महत्वाकांक्षी योजनाएं जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने निर्माण कार्य की उचित मॉनिटरिंग नहीं की, जिससे ठेकेदार को मनमानी करने का अवसर मिला। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य का तकनीकी परीक्षण कराया जाए तो कई अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। उन्होंने मांग की है कि सड़क की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

बिलासपुर जिले में घटिया सड़क निर्माण का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले मस्तूरी ब्लॉक के अमगांव में करीब 1 करोड़ 40 लाख रुपए की लागत से बनी एक किलोमीटर लंबी सड़क भी कुछ दिनों में उखड़ने लगी थी।उस मामले में भी ग्रामीणों ने सड़क की डामर परत हाथ से निकलने का वीडियो वायरल किया था। आरोप लगाया गया था कि निर्माण में मुरूम की जगह मिट्टी का उपयोग किया गया और गुणवत्ता के अनुरूप डामर नहीं डाला गया। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

सड़क निर्माण की तकनीकी जांच कराई जाए

निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की लैब टेस्टिंग हो

दोषी ठेकेदार और अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए

सड़क का दोबारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए

भविष्य में निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए। अगर समय रहते मामले पर कार्रवाई नहीं हुई तो यह मुद्दा प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण की बड़ी बहस बन सकता है।



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