पब्लिक स्वर,रायपुर। रायपुर के बीरगांव स्थित रावाभाठा में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान बुधवार को भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गई। विरोध प्रदर्शन के दौरान दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया।
जानकारी के अनुसार, जिला प्रशासन की ओर से बीरगांव में सुशासन तिहार शिविर का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में आयोजन स्थल पहुंचे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते माहौल गरमा गया और कार्यक्रम स्थल के बाहर अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।
बैरिकेड के पास बढ़ा तनाव
प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड के समीप कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच भी धक्का-मुक्की हुई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार कर कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। स्थिति तनावपूर्ण होती देख अतिरिक्त पुलिस बल को भी मौके पर तैनात किया गया, जिसके बाद हालात पर काबू पाया गया।
इन मुद्दों को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन
कांग्रेस कार्यकर्ता महिलाओं को आवासीय पट्टा वितरण, 500 रुपये में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने और महतारी वंदन योजना की राशि से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सरकार जनता से किए गए कई वादों को पूरा करने में विफल रही है। कार्यकर्ताओं ने इन मांगों को लेकर कार्यक्रम स्थल के बाहर लंबे समय तक नारेबाजी की।
विधायक के खिलाफ भी लगे नारे
प्रदर्शन के दौरान रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। कांग्रेस के ग्रामीण जिला अध्यक्ष पप्पू बंजारे, स्थानीय पार्षदों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान विधायक के काफिले को रोकने का प्रयास भी किया गया, हालांकि पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर आवागमन सामान्य बनाए रखा।
कांग्रेस का दावा- प्रशासन को पहले से दी थी सूचना
कांग्रेस ग्रामीण जिला अध्यक्ष पप्पू बंजारे ने कहा कि प्रदर्शन पूर्व निर्धारित था और इसकी जानकारी प्रशासन को पहले ही दे दी गई थी। उनके अनुसार, कांग्रेस कार्यकर्ता जनता से जुड़े मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने पहुंचे थे। बंजारे ने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन जनता की समस्याओं की अनदेखी कर रहे हैं, जिसके विरोध में लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन किया गया। वहीं पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में स्थिति सामान्य होने के बाद सुशासन तिहार का कार्यक्रम निर्धारित रूप से आगे संचालित होता रहा।
राजनीतिक संदेश भी छोड़ गया घटनाक्रम
सुशासन तिहार जैसे सरकारी कार्यक्रम के दौरान हुआ यह विरोध प्रदर्शन आगामी राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर कांग्रेस ने जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की, वहीं प्रशासन और पुलिस के लिए कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संचालित कराना बड़ी चुनौती बन गया। हालांकि समय रहते हस्तक्षेप किए जाने से कोई बड़ा विवाद या अप्रिय घटना नहीं हुई।

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