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जंगल गई युवती पर भालू ने किया हमला, ग्रामीणों ने बचाई जान



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पब्लिक स्वर,मरवाही। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही वन क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। ताजा मामले में मरवाही रेंज के मगुरदा गांव की एक युवती पर भालू ने हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में भय का माहौल है। चिंताजनक बात यह है कि पिछले तीन महीनों के भीतर क्षेत्र में भालू के हमले की यह तीसरी घटना बताई जा रही है।

जंगल में अचानक हुआ हमला

जानकारी के अनुसार, मगुरदा गांव निवासी नंदी ओट्टी सोमवार सुबह किसी कार्य से जंगल की ओर गई थी। इसी दौरान पीछे से आए एक भालू ने अचानक उस पर हमला कर दिया। अप्रत्याशित हमले से घबराई युवती ने बचाव के लिए शोर मचाया और मदद की गुहार लगाई। युवती की चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए भालू को जंगल की ओर खदेड़ा और घायल युवती को सुरक्षित बाहर निकाला।

पैर और जांघ में गंभीर चोटें

ग्रामीणों की मदद से घायल युवती को तत्काल मरवाही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार किया। चिकित्सकों के अनुसार भालू के हमले में युवती के पैर और जांघ में गंभीर चोटें आई हैं। बेहतर इलाज के लिए उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया। राहत की बात यह है कि उपचार के बाद उसकी स्थिति फिलहाल सामान्य बताई जा रही है।

लगातार बढ़ रही भालू हमलों की घटनाएं

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन महीनों में भालू के हमले की यह तीसरी घटना है। लगातार हो रही घटनाओं से गांवों में दहशत का माहौल है और लोग जंगल जाने से डरने लगे हैं। ग्रामीणों के अनुसार सुबह और शाम के समय वन क्षेत्रों के आसपास भालुओं की मौजूदगी पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रही है।

क्यों बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष?

वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, जंगलों में मानवीय गतिविधियों का बढ़ना, वन क्षेत्र में कटाव, खाद्य स्रोतों की कमी और पानी की तलाश जैसे कारण वन्यजीवों को आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने के लिए मजबूर कर रहे हैं। विशेष रूप से भालू ऐसे क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं जहां उन्हें भोजन आसानी से उपलब्ध हो जाता है। इससे इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं।

छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में स्लॉथ बियर (भालू) के हमलों के मामले अक्सर तब सामने आते हैं, जब ग्रामीण जंगलों में लकड़ी, महुआ, तेंदूपत्ता या अन्य वनोपज संग्रह करने जाते हैं। अचानक आमना-सामना होने पर भालू आक्रामक हो सकता है।

वन विभाग से सुरक्षा उपायों की मांग

घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त और निगरानी बढ़ाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, ग्रामीणों को जागरूक किया जाए और वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष व्यवस्था की जाए। स्थानीय लोगों का मानना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं। फिलहाल भालू के हमले की ताजा घटना ने एक बार फिर मरवाही क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष के बढ़ते खतरे को उजागर कर दिया है।



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