महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण में अहम बदलाव
दन्तेवाड़ा जिले की अभिनव पहल, बापी न उवाट जिला प्रशासन एवं यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से जिले में कुपोषण की दर में कमी लाने तथा स्वास्थ्य व्यवहारों को अपनाने 10 दिसंबर 2020 को बापी न उवाट कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। दादी या नानी को दंतेवाड़ा जिले के गोंडी बोली में बापी कहा जाता है। जिले की 200 बापी ग्राम पंचायतों में समुदाय के बीच में रहकर समुदाय को स्वस्थ व्यवहारों को अपनाने प्रेरित कर रही है। बापी के साथ साथ अब युवा भी सतरंगी नायक एवं नायिका के रूप में समुदाय को जागरूक करने आगे आ रहे है। ऐसे में बापी समुदाय स्तर पर देवगुड़ी में सतरंगी सभा, ग्राम सभा, महिला सभा, युवा सभा के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से व्यवहारों को अपनाने प्रेरित कर रही है। किसी ने सोचा नही था दंतेवाड़ा जैसे अतिसंवेदनशील एवं दुरांचल क्षेत्र में बुजुर्ग महिलाएं बापी की भूमिका अदा करते हुए, दंतेवाड़ा में सफलता की कहानी गढ़ेंगे और वो सात समंदर पार मोरक्को में गूंजी।

Public Swar Desk
















