पब्लिक स्वर,रायपुर। रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में गुरुवार देर रात भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही समय में विश्वविद्यालय के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। घटना तेलीबांधा थाना क्षेत्र की बताई जा रही है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग उस हिस्से में लगी, जहां कृषि अनुसंधान और फसल परीक्षण से संबंधित सामग्री रखी गई थी। आग ने देखते ही देखते कई एकड़ क्षेत्र को प्रभावित किया, जिससे परीक्षण में लगी फसलें और शोध से जुड़े उपकरण जलकर खाक हो गए। इस हादसे में करीब 20 लाख रुपये से अधिक के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।
आग लगने के बाद विश्वविद्यालय परिसर और आसपास के हॉस्टल क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई, जिससे छात्र-छात्राओं को रातभर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। धुएं और लपटों के कारण पूरे परिसर में दहशत का माहौल बन गया।
घटना के दौरान सबसे गंभीर आरोप विश्वविद्यालय प्रबंधन की प्रतिक्रिया को लेकर सामने आए हैं। छात्रों का कहना है कि आग लगने के तुरंत बाद दमकल विभाग को सूचना नहीं दी गई। आरोप है कि प्रारंभिक स्तर पर मामले को संभालने की कोशिश में देरी हुई, जिससे आग और फैल गई।
इस बीच विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मी और छात्र स्वयं आग बुझाने में जुटे रहे। सीमित संसाधनों के बीच कई घंटों तक प्रयास किए गए, लेकिन आग पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका। स्थिति बिगड़ने पर दमकल विभाग को सूचना दी गई, जिसके बाद दो फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
दमकल टीम की तत्परता से आग को आसपास के अन्य हिस्सों में फैलने से रोक लिया गया, जिससे एक बड़े हादसे की आशंका टल गई। हालांकि, यह घटना विश्वविद्यालय की आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े करती है, खासकर ऐसे संस्थान में जहां ज्वलनशील जैविक सामग्री और शोध संसाधन बड़े पैमाने पर मौजूद होते हैं।
फिलहाल आग लगने के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस और प्रशासनिक टीम मौके का निरीक्षण कर जांच में जुटी है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो पाएगा कि आग महज एक दुर्घटना थी या इसके पीछे लापरवाही की कोई बड़ी कड़ी जुड़ी हुई है।

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