पब्लिक स्वर,जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा जिले में गृहमंत्री विजय शर्मा के प्रस्तावित दौरे से पहले राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया। युवा कांग्रेस द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन और पुलिस की तत्पर कार्रवाई ने इस पूरे घटनाक्रम को महज एक स्थानीय विरोध से आगे बढ़ाकर कानून-व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही के बड़े सवालों से जोड़ दिया है।
युवा कांग्रेस ने गृहमंत्री के तेंदुआ गांव में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने की सूचना पर पहले ही विरोध का ऐलान कर दिया था। इस विरोध का स्वर केवल प्रतीकात्मक नहीं था, बल्कि इसके पीछे करही गांव में हुए कथित गोलीकांड को लेकर गहरी नाराजगी थी। संगठन का आरोप है कि घटना के बाद भी गृहमंत्री द्वारा पीड़ित परिवार से मुलाकात नहीं की गई, जिससे क्षेत्र में असंतोष बना हुआ है। यह मुद्दा स्थानीय स्तर पर संवेदनशील बन चुका है और राजनीतिक रूप से भी असर डाल रहा है।
विरोध को संगठित रूप देने के लिए युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज शुक्ला ने सोशल मीडिया के माध्यम से काला झंडा दिखाने की घोषणा की थी। यह कदम स्पष्ट रूप से सरकार के खिलाफ सार्वजनिक असहमति दर्ज कराने की रणनीति का हिस्सा था। हालांकि, प्रशासन पहले से अलर्ट मोड में था। जैसे ही कार्यकर्ता कचहरी चौक के पास एकत्र होकर कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ने लगे, पुलिस ने उन्हें रोक लिया और एहतियातन हिरासत में ले लिया।
पुलिस की यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दृष्टिकोण से की गई, लेकिन इससे राजनीतिक टकराव की स्थिति भी स्पष्ट होती है। हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को कंट्रोल रूम में रखा गया, जिससे संभावित प्रदर्शन को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से पहले ही नियंत्रित कर लिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच युवा कांग्रेस ने केवल विरोध तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया का सहारा लेते हुए तहसीलदार आर.के. मरावी को ज्ञापन भी सौंपा। इस ज्ञापन में करही गोलीकांड की उच्च स्तरीय एसआईटी जांच की मांग की गई है। यह मांग संकेत देती है कि संगठन इस मुद्दे को केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसे जांच और न्याय की दिशा में आगे बढ़ाना चाहता है।

User 1









