पब्लिक स्वर,बलरामपुर। बलरामपुर जिले के राजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम भेलाई स्थित एक क्रशर प्लांट में हुए दर्दनाक हादसे ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कन्वेयर बेल्ट की सफाई के दौरान लोहे की भारी जाली गिरने से 20 वर्षीय मजदूर अल्मोन गंभीर रूप से घायल हो गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद मजदूरों ने प्लांट प्रबंधन पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी और घटना को दबाने की कोशिश करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
सफाई के दौरान हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, रविवार को सिंघल क्रशर प्लांट में कार्यरत मजदूर अल्मोन को कन्वेयर बेल्ट की सफाई के लिए लगाया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सफाई के दौरान अचानक ऊपर लगी लोहे की भारी-भरकम जाली टूटकर उसके ऊपर गिर गई। हादसा इतना गंभीर था कि युवक जाली के नीचे दब गया और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
घटना के बाद वहां मौजूद मजदूरों ने गैस कटर और जेसीबी की मदद से उसे बाहर निकाला। गंभीर हालत में पहले स्थानीय स्तर पर उपचार की कोशिश की गई, फिर अंबिकापुर मिशन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। सोमवार को शव को पोस्टमॉर्टम के लिए मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल भेजा गया।
सरगुजा का रहने वाला था मृतक
मृतक अल्मोन सरगुजा जिले के लुण्ड्रा थाना क्षेत्र के खाराकोना गांव का निवासी था। हादसे की सूचना मिलते ही उसके परिजन रात में ही अंबिकापुर पहुंच गए। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर बताई जा रही है और युवक मजदूरी कर परिवार का सहारा था।
मजदूरों के गंभीर आरोप
अल्मोन के साथ काम कर रहे मजदूर ने दावा किया कि प्लांट में सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम तक नहीं थे। मजदूरों को न तो सुरक्षा उपकरण दिए गए थे और न ही मौके पर फर्स्ट एड किट उपलब्ध थी। हादसे के बाद एंबुलेंस तक समय पर नहीं मिल सकी। माजदूर ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के बाद मजदूरों पर दबाव बनाया गया कि वे घटना को “जेसीबी की बकेट से दबने” का मामला बताएं, ताकि वास्तविक स्थिति छिपाई जा सके। यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो मामला केवल लापरवाही का नहीं बल्कि साक्ष्य प्रभावित करने की कोशिश का भी बन सकता है।
क्रशर प्लांटों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
बलरामपुर और सरगुजा संभाग के कई इलाकों में बड़ी संख्या में स्टोन क्रशर प्लांट संचालित हैं। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि इन प्लांटों में श्रमिक सुरक्षा नियमों का पालन कागजों तक सीमित है। मजदूरों को बिना हेलमेट, ग्लव्स, सेफ्टी बेल्ट और अन्य सुरक्षा उपकरणों के जोखिम भरे कामों में लगाया जाता है।
मालिकाना बदलाव और जिम्मेदारी का सवाल
स्थानीय जानकारी के मुताबिक, जिस क्रशर प्लांट में हादसा हुआ, उसे पूर्व संचालक विजय सिंघल ने कुछ महीने पहले क्रशर संघ के जिलाध्यक्ष मुकेश अग्रवाल समेत अन्य लोगों को बेच दिया था। ऐसे में अब संचालन और सुरक्षा जिम्मेदारी किसके पास थी, यह जांच का विषय बन गया है।
जांच की मांग तेज
मामले को लेकर अजजा आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के क्रशर प्लांटों में आदिवासी मजदूरों का शोषण हो रहा है और शिकायतों पर केवल औपचारिक नोटिस देकर मामले दबा दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया जाता, तो यह हादसा टाला जा सकता था। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में केवल औपचारिक कार्रवाई करेगा या श्रमिक सुरक्षा को लेकर व्यापक जांच और जवाबदेही तय की जाएगी।

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