पब्लिक स्वर,रायपुर। रायपुर नगर निगम द्वारा घर-घर कचरा संग्रहण (डोर-टू-डोर वेस्ट कलेक्शन) के लिए यूजर चार्ज में बढ़ोतरी किए जाने के बाद शहर में राजनीतिक और सामाजिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस, आम नागरिकों और व्यापारी संगठनों ने बढ़े हुए शुल्क का विरोध जताया है, जबकि नगर निगम और महापौर मीनल चौबे का कहना है कि यह निर्णय नई व्यवस्था नहीं, बल्कि पूर्व में तय नियमों और अनुबंधों के तहत लागू किया गया है।नई दरों के अनुसार, घरेलू उपभोक्ताओं पर सालाना 120 रुपये और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लगभग 600 रुपये तक का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। बढ़ती महंगाई के बीच इस फैसले को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
कांग्रेस ने खोला मोर्चा, हस्ताक्षर अभियान शुरू
यूजर चार्ज वृद्धि के विरोध में कांग्रेस ने तेलीबांधा तालाब के पास हस्ताक्षर अभियान चलाया। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। बाद में हस्ताक्षरित फ्रेम को नगर निगम मुख्यालय के सामने लगाकर विरोध दर्ज कराया गया।
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि जब शहर के कई इलाकों में सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं है और नियमित कचरा संग्रहण भी नहीं हो रहा, तब जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो कांग्रेस आंदोलन को और तेज करेगी।
महापौर का पलटवार: फैसला कांग्रेस परिषद ने लिया था
विवाद के बीच महापौर मीनल चौबे ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यूजर चार्ज बढ़ाने का निर्णय वर्ष 2022 में कांग्रेस की परिषद के कार्यकाल में ही लिया गया था। उन्होंने बताया कि डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाली एजेंसी के साथ हुए अनुबंध में यह स्पष्ट प्रावधान था कि कंपनी को भुगतान यूजर चार्ज से किया जाएगा। महापौर ने कहा कि राज्य सरकार के 7 दिसंबर 2017 के आदेश के अनुसार यूजर चार्ज की विभिन्न श्रेणियों में हर तीन साल बाद बढ़ोतरी का प्रावधान है। वर्तमान वृद्धि उसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शहर में अभी 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि निगम सफाई व्यवस्था सुधारने और कचरा संग्रहण एजेंसी की नियमित मॉनिटरिंग पर विशेष ध्यान देगा।
2022 में भाजपा ने किया था विरोध
दिलचस्प बात यह है कि वर्ष 2022 में जब नगर निगम में कांग्रेस की परिषद थी, तब भाजपा ने यूजर चार्ज बढ़ाने का जोरदार विरोध किया था। उस समय मीनल चौबे नेता प्रतिपक्ष थीं। 15 मार्च 2022 को संपत्तिकर और यूजर चार्ज पर चर्चा की मांग को लेकर भाजपा पार्षदों ने निगम सभा में हंगामा किया था। आसंदी के सामने नारेबाजी के बाद भाजपा के आठ पार्षदों को निलंबित कर दिया गया था। बाद में यह मामला राजनीतिक विवाद का बड़ा मुद्दा बना था।
जनता और व्यापारी वर्ग में नाराजगी
यूजर चार्ज बढ़ने से आम नागरिकों और व्यापारी वर्ग में भी असंतोष है। लोगों का कहना है कि पहले नगर निगम को सफाई व्यवस्था और कचरा संग्रहण प्रणाली को पूरी तरह दुरुस्त करना चाहिए, उसके बाद अतिरिक्त शुल्क लेना चाहिए। व्यापारी अशोक पटेल का कहना है कि शहर के कई क्षेत्रों में नियमित सफाई नहीं होती और कचरा समय पर नहीं उठाया जाता। ऐसे में बढ़ा हुआ यूजर चार्ज उचित नहीं लगता। वहीं नागरिक प्रतीक तिवारी ने कहा कि महंगाई के इस दौर में लोगों का घरेलू बजट पहले से ही प्रभावित है। ऐसे फैसले आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा सकते हैं।
क्या है यूजर चार्ज?
यूजर चार्ज वह शुल्क है जो नगर निगम नागरिकों को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं के बदले वसूलता है। रायपुर में यह शुल्क मुख्य रूप से घर-घर कचरा संग्रहण, कचरा परिवहन और सफाई व्यवस्था के संचालन के लिए लिया जाता है। नगर निगम का तर्क है कि सफाई व्यवस्था और कचरा संग्रहण पर होने वाले खर्च का एक हिस्सा इसी शुल्क से पूरा किया जाता है। वहीं विरोध करने वालों का कहना है कि जब तक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक शुल्क वृद्धि को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
अब आगे क्या?
यूजर चार्ज वृद्धि को लेकर शहर में बहस तेज हो गई है। एक ओर निगम इसे पूर्व निर्धारित नियमों और वित्तीय आवश्यकता से जोड़ रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष और नागरिक बेहतर सफाई सेवाओं के बिना अतिरिक्त शुल्क वसूली को गलत बता रहे हैं। फिलहाल कांग्रेस ने आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है, जिससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्मा सकता है।

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