पब्लिक स्वर/ ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा के दौरान इस वर्ष आस्था और भक्ति का अद्भुत नज़ारा देखने को मिला। दो से तीन लाख श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने पुरी की सड़कों पर उमड़कर रथ खींचने का सौभाग्य प्राप्त किया। हालांकि, भीड़ का अत्यधिक दबाव होने के कारण अफरा-तफरी की स्थिति बन गई, जिससे करीब 700 लोग घायल हो गए।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए सभी घायलों के इलाज की व्यवस्था की। जिला मुख्यालय अस्पताल (DHH) सहित विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार दिया गया। इनमें से 485 लोगों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि चार गंभीर घायलों को आईसीयू में भर्ती किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल में हुई दो मौतें रथयात्रा से संबंधित नहीं थीं। एक व्यक्ति लीवर सिरोसिस और एक अन्य बुजुर्ग महिला क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज से पीड़ित थीं।
रथयात्रा की शुरुआत सुबह "पहांडी बिजे" अनुष्ठान से हुई, जिसके बाद पुरी के गजपति महाराज ने "छेरा पहनरा" की रस्म निभाई। दोपहर तीन बजे रथ खींचने की प्रक्रिया शुरू हुई जो शाम छह बजे तक चली।
इस दौरान इस्कॉन मंदिर समेत कई संगठनों ने श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क प्रसाद और पेयजल की व्यवस्था की। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को अलर्ट मोड पर रखा गया था।
भले ही भीड़ प्रबंधन में कुछ खामियां सामने आईं, लेकिन त्वरित राहत और उपचार के चलते बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन ने भविष्य के आयोजनों के लिए व्यवस्था और अधिक दुरुस्त करने की बात कही है।

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