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बिजली संकट पर केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू का सख्त रुख, अफसरों से मांगा खर्च और मेंटेनेंस का पूरा हिसाब



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पब्लिक स्वर,बिलासपुर। लगातार बिजली कटौती से जूझ रहे बिलासपुर के लोगों की परेशानी अब राजनीतिक स्तर पर भी बड़ा मुद्दा बन गई है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने बिजली व्यवस्था में लगातार आ रही खामियों और लंबे समय तक हो रही बिजली कटौती को लेकर बिजली विभाग के अधिकारियों की कड़ी क्लास लगाई। आमतौर पर शांत और सहज स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले मंत्री का इस बार सख्त तेवर देखने को मिला।

जानकारी के अनुसार, शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगहों पर घंटों तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कई इलाकों में 12 से 24 घंटे तक बिजली बहाल नहीं होने से आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ती शिकायतों के बीच केंद्रीय मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को अपने निवास पर तलब कर जवाब मांगा।

बैठक के दौरान अधिकारियों ने बिजली व्यवस्था सुधार और मरम्मत कार्यों पर लगभग 50 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी दी। इस पर मंत्री ने खर्च का विस्तृत ब्योरा मांगते हुए पूछा कि आखिर इतने खर्च के बावजूद बिजली व्यवस्था में सुधार क्यों दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि मेंटेनेंस कार्यों, उपकरणों की मरम्मत, ट्रांसफार्मरों की स्थिति और ओवरलोड की समस्या से संबंधित पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

तोखन साहू ने अधिकारियों से यह भी पूछा कि यदि ट्रांसफार्मरों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है और आग लगने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं, तो विभाग ने अतिरिक्त ट्रांसफार्मर या अन्य जरूरी संसाधनों की मांग समय रहते क्यों नहीं की। उन्होंने कहा कि जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है और इसमें लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

बैठक के दौरान मंत्री ने उपभोक्ता शिकायतों के निस्तारण को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बिजली गुल होने पर लोग जब सर्विस सेंटरों में संपर्क करते हैं तो कई बार फोन तक नहीं उठाया जाता। ऐसी स्थिति में लोगों का आक्रोश बढ़ना स्वाभाविक है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तकनीकी खराबी या मरम्मत कार्य की स्थिति में उपभोक्ताओं को समय पर जानकारी उपलब्ध कराई जाए ताकि अनावश्यक भ्रम और असंतोष की स्थिति न बने।

सूत्रों के मुताबिक मंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि बिजली व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ तो वह इस पूरे मामले को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष उठाएंगे। बैठक के बाद विभागीय अधिकारियों ने भी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए विभिन्न सर्विस सेंटरों के प्रभारी अधिकारियों और कर्मचारियों की बैठक बुलाकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।

बिलासपुर में बढ़ती गर्मी और लगातार हो रही बिजली कटौती के बीच केंद्रीय मंत्री का यह हस्तक्षेप महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभागीय स्तर पर किए जा रहे दावों और जमीनी हकीकत के बीच मौजूद अंतर को पाटने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं और आम उपभोक्ताओं को कब तक राहत मिलती है।



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