पब्लिक स्वर,दंतेवाड़ा। देश की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक कंपनी एनएमडीसी एक बार फिर अपनी निविदा (टेंडर) प्रक्रिया को लेकर विवादों में घिरती नजर आ रही है। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं जिला पंचायत सदस्य तुलिका कर्मा ने प्रेसवार्ता कर आरोप लगाया है कि एनएमडीसी और उससे जुड़े कार्यों में टेंडर प्रक्रिया को इस तरह संचालित किया जा रहा है जिससे स्थानीय पंजीकृत ठेकेदारों को अवसर नहीं मिल पा रहा है और करोड़ों रुपये के कार्य जिले से बाहर के ठेकेदारों को सौंपे जा रहे हैं।
तुलिका कर्मा ने आरोप लगाया कि सीएसआर मद सहित विभिन्न विकास कार्यों की निविदाओं में पारदर्शिता का अभाव है। स्थानीय ठेकेदारों का कहना है कि कई बार पोर्टल और सूचनाओं तक उनकी पहुंच नहीं हो पाती, जबकि चुनिंदा लोगों को पहले से जानकारी मिल जाती है। इससे पूरी प्रक्रिया पर संदेह उत्पन्न हो रहा है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि जिले के कई स्थानीय ठेकेदारों का वर्षों से भुगतान लंबित है, जबकि दूसरी ओर नए-नए कार्यों का आवंटन बाहरी एजेंसियों को किया जा रहा है। इससे स्थानीय रोजगार, व्यवसाय और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
गौरतलब है कि हाल के महीनों में एनएमडीसी से जुड़े कई बड़े और करोड़ों रुपये के टेंडर जारी हुए हैं, जिनमें दंतेवाड़ा और बचेली क्षेत्र के कार्य भी शामिल हैं। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध निविदा सूचनाओं के अनुसार करोड़ों रुपये के कार्यों के लिए निविदाएं जारी की गई हैं।
प्रेसवार्ता में यह सवाल भी उठाया गया कि यदि एनएमडीसी बस्तर के संसाधनों से अरबों रुपये का उत्पादन कर रही है तो उसके विकास कार्यों और सीएसआर योजनाओं का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय युवाओं, ठेकेदारों और व्यवसायियों को क्यों नहीं मिल रहा। उन्होंने मांग की कि सभी निविदाओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक और पारदर्शी बनाया जाए।
तुलिका कर्मा ने चेतावनी दी कि यदि स्थानीय लोगों की अनदेखी जारी रही तो इस मुद्दे को जनआंदोलन का रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दंतेवाड़ा की जमीन, जंगल और खनिज संपदा से होने वाले विकास में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना एनएमडीसी की नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है।

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