पब्लिक स्वर,गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में संचालित डायल-112 फेस-2 नेक्स्ट जनरेशन सेवा ने एक बार फिर अपनी संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई का परिचय दिया है। समय पर मिली सहायता और टीम की सूझबूझ के चलते एक गर्भवती महिला ने डायल-112 वाहन में ही सुरक्षित रूप से स्वस्थ बालक को जन्म दिया। प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी स्थिति सामान्य बताई गई है।
प्रसव पीड़ा के दौरान मांगी गई थी मदद
जानकारी के अनुसार, 15 जून को ग्राम गांगपुर निवासी मानसिंह ने डायल-112 पर कॉल कर एक गर्भवती महिला के लिए तत्काल सहायता की मांग की। महिला को तेज प्रसव पीड़ा हो रही थी और उसे जल्द अस्पताल पहुंचाना आवश्यक था। सूचना मिलते ही गौरेला फाल्कन-2 (खोडरी) की टीम को मौके पर रवाना किया गया। डायल-112 टीम के आरक्षक राजाराम बसंत और चालक संतोष राठौर बिना देर किए गांव पहुंचे और 22 वर्षीय सरस्वती मरपच्ची, पति विनोद मरपच्ची, को उनके परिजनों और मितानिन के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौरेला ले जाने के लिए रवाना हुए।
रास्ते में बिगड़ी स्थिति, वाहन में ही कराना पड़ा प्रसव
अस्पताल पहुंचने से पहले ही ग्राम गिरवर के पास महिला की प्रसव पीड़ा अचानक काफी बढ़ गई। स्थिति ऐसी बन गई कि तत्काल प्रसव कराना जरूरी हो गया। आपात परिस्थिति को देखते हुए डायल-112 टीम ने वाहन को सुरक्षित स्थान पर रोका और त्वरित निर्णय लिया। महिला की गोपनीयता और सम्मान को प्राथमिकता देते हुए वाहन के भीतर पर्दे की व्यवस्था की गई। इसके बाद परिजनों और मितानिन के सहयोग से डायल-112 वाहन में ही सुरक्षित प्रसव कराया गया। कुछ ही देर में सरस्वती मरपच्ची ने एक स्वस्थ बालक को जन्म दिया। प्रसव के बाद टीम ने मां और नवजात को सुरक्षित रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौरेला पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने दोनों का स्वास्थ्य परीक्षण कर भर्ती कर लिया।
ग्रामीणों ने की टीम की सराहना
घटना के बाद क्षेत्र के लोगों ने डायल-112 टीम की तत्परता, मानवीय संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की सराहना की। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर सहायता नहीं मिलती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। टीम की सूझबूझ और त्वरित निर्णय से सुरक्षित प्रसव संभव हो सका।
आपात सेवाओं की उपयोगिता का उदाहरण
यह घटना केवल एक सफल रेस्क्यू नहीं, बल्कि आपातकालीन सेवाओं की वास्तविक उपयोगिता का भी उदाहरण है। सामान्यतः डायल-112 को कानून-व्यवस्था और आपात सहायता से जोड़ा जाता है, लेकिन कई मामलों में यह सेवा स्वास्थ्य संबंधी आपात परिस्थितियों में भी लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रही है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की यह घटना दर्शाती है कि प्रशिक्षित कर्मियों, त्वरित प्रतिक्रिया और मानवीय दृष्टिकोण के साथ आपातकालीन सेवाएं दूरस्थ क्षेत्रों में भी लोगों के लिए भरोसे का मजबूत आधार बन सकती हैं।

User 1










