पब्लिक स्वर,धरसीवां। नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में बढ़ते राजनीतिक दबाव और लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच रायपुर ग्रामीण पुलिस ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। मामले की जांच में लापरवाही बरतने के आरोप में सिलयारी चौकी प्रभारी एवं उप निरीक्षक जितेंद्र दुबे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई रायपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने की है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, धरसीवां थाना अंतर्गत सिलयारी चौकी में दर्ज अपराध की जांच के दौरान गंभीर लापरवाही पाए जाने पर चौकी प्रभारी को निलंबित करते हुए पुलिस अधीक्षक रायपुर (ग्रामीण) कार्यालय से संबद्ध किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। साथ ही मामले की प्रारंभिक जांच कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
राजनीतिक मुद्दा बना मामला
नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।भाजपा की ओर से पूर्व विधायक देवजी भाई पटेल, जिला पंचायत सभापति सरोज चंद्रवंशी और भाजपा नेता दिनेश अग्रवाल ने पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग करते हुए मामले को प्रमुखता से उठाया था। भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर ग्रामीण एसपी कार्यालय पहुंचकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
कांग्रेस ने भी खोला मोर्चा
वहीं कांग्रेस ने भी इस मामले को लेकर धरसीवां और आसपास के क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन किया। पूर्व विधायक अनिता योगेंद्र शर्मा, जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष पप्पू राजेंद्र बंजारे, उधोराम वर्मा, पीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष भावेश बघेल और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष आशीष वर्मा सहित कई नेताओं ने प्रदर्शन कर माना सीएसपी को ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस नेताओं ने आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी, पॉक्सो एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई और सिलयारी चौकी प्रभारी के निलंबन की मांग करते हुए पुलिस प्रशासन को 12 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। साथ ही मांगें पूरी नहीं होने पर 9 जून को चक्काजाम और उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी गई थी।
निलंबन के बाद भी बनी हुई है निगाहें
चौकी प्रभारी के निलंबन को पुलिस की जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़िता को न्याय दिलाने को लेकर राजनीतिक दलों और स्थानीय लोगों की निगाहें अब भी पुलिस जांच पर टिकी हुई हैं। फिलहाल, पुलिस विभाग की यह कार्रवाई मामले में हुई कथित जांच संबंधी चूक को लेकर जवाबदेही तय करने की शुरुआत मानी जा रही है। अब एक सप्ताह में आने वाली प्रारंभिक जांच रिपोर्ट और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।

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