पब्लिक स्वर की खबर का असर: भारतमाला मुआवजा घोटाले की फिर होगी व्यापक जांच, हर खसरा नंबर की होगी पड़ताल



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पब्लिक स्वर,रायपुर। भारतमाला प्रोजेक्ट के मुआवजा फर्जीवाड़े को लेकर एक बार फिर प्रशासन हरकत में आया है। इस बार जांच का दायरा सीमित शिकायतों से आगे बढ़ाकर सभी खसरा नंबरों तक विस्तारित किया गया है। संभाग आयुक्त महादेव कांवरे ने इस मामले में दो नई जांच टीमों का गठन किया है, जिन्हें एक महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

जारी आदेश के अनुसार रायपुर जिले में जांच की जिम्मेदारी डिप्टी कलेक्टर ज्योति सिंह के नेतृत्व में गठित टीम को दी गई है, जबकि धमतरी जिले के मामलों की जांच अपर कलेक्टर पवन कुमार की अगुवाई में की जाएगी। इस बार जांच का फोकस उन खसरा नंबरों पर भी रहेगा, जिनकी अब तक कोई शिकायत सामने नहीं आई थी। प्रशासन का मानना है कि घोटाले की परतें सिर्फ शिकायतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापक स्तर पर गड़बड़ियों की आशंका है।

गौरतलब है कि इससे पहले तीन अलग-अलग टीमें इस प्रकरण की जांच कर चुकी हैं, लेकिन उनका दायरा केवल शिकायत प्राप्त खसरा नंबरों तक सीमित था। यही वजह रही कि कई संदिग्ध मामलों की गहन पड़ताल नहीं हो सकी। अब नए सिरे से की जा रही जांच को अधिक व्यापक और निर्णायक माना जा रहा है।

इस पूरे मामले ने तब तूल पकड़ा जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। जांच में यह संकेत मिले हैं कि मुआवजा वितरण में उच्च स्तर के अधिकारियों—जैसे आईएएस, एसडीएम, डिप्टी कलेक्टर और तहसीलदार—की भूमिका भी संदिग्ध रही है। हालांकि अब तक केवल डिप्टी कलेक्टर निर्भय कुमार साहू और शशिकांत कुर्रे की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन जांच एजेंसियों का दावा है कि इसमें और भी अधिकारी शामिल हो सकते हैं।

इसी पृष्ठभूमि में अब हर खसरा नंबर की बारीकी से जांच का फैसला लिया गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मुआवजा वास्तविक हितग्राहियों को नियमानुसार मिला या नहीं। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी मिलने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, पूरे मामले में एक नाम—अन्नू तारक—अब भी चर्चा में है, लेकिन आधिकारिक जांच में उसका जिक्र सामने नहीं आया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या उसे किसी स्तर पर संरक्षण प्राप्त है, या फिर जांच में उसका नाम सामने आएगा। नई जांच टीमों की रिपोर्ट इस दिशा में भी कई अहम खुलासे कर सकती है।



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