पब्लिक स्वर,बालोद। बालोद जिले के डौंडी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम छिन्दगांव में अंधविश्वास और इलाज में लापरवाही के चलते 11 वर्षीय मासूम की मौत हो गई। सांप काटने के बाद बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन करीब 50 किलोमीटर दूर मंदिर में झाड़फूंक कराने ले गए। इलाज में हुई देरी के कारण बच्चे की जान नहीं बच सकी।
जानकारी के अनुसार, ग्राम छिन्दगांव निवासी गीतेश ढीमर (11 वर्ष), जो कक्षा 6वीं का छात्र था, शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे अपने घर की बाड़ी में ब्रश कर रहा था। इसी दौरान ड्रम के नीचे छिपे जहरीले सांप ने उसे डस लिया। सांप काटने के बाद बच्चा चिल्लाते हुए परिजनों के पास पहुंचा और घटना की जानकारी दी।
परिजनों ने उसे तत्काल घर से महज 2 किलोमीटर दूर स्थित डौंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के बजाय निजी वाहन से बालोद ब्लॉक के एक गांव स्थित मंदिर में झाड़फूंक के लिए पहुंचा दिया। बताया जा रहा है कि मंदिर में कई घंटों तक झाड़फूंक चलती रही। दोपहर करीब 12 बजे जब बच्चे की हालत बेहद गंभीर हो गई, तब परिजन उसे जिला अस्पताल बालोद लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।
बालोद पुलिस के मुताबिक, सांप काटने के मामलों में मरीज को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी होता है, जहां एंटीवेनम इंजेक्शन देकर जान बचाई जा सकती है। पुलिस ने बताया कि परिजन जिला अस्पताल के सामने से गुजरने के बावजूद बच्चे को अस्पताल नहीं ले गए और झाड़फूंक के चक्कर में समय गंवाते रहे। इसी देरी के कारण जहर पूरे शरीर में फैल गया।
बेहद गरीब परिवार का इकलौता बेटा था गीतेश
ग्राम छिन्दगांव के उपसरपंच पवन साहू ने बताया कि मृतक गीतेश बेहद गरीब परिवार से था। उसके पिता कन्हैयालाल ढीमर मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिवार में गीतेश की एक बड़ी बहन है और वह घर का इकलौता बेटा था। उन्होंने बताया कि घर में शौचालय निर्माण का कार्य चल रहा था। इसके लिए गड्ढा खोदा गया था और पास में पानी की टंकी व ईंटें रखी थीं। संभवतः वहीं सांप छिपा हुआ था। सुबह बाड़ी में ब्रश करते समय बच्चे को सांप ने काट लिया।
डौंडी थाना प्रभारी शिशुपाल सिन्हा ने बताया कि बच्चे को जब अस्पताल लाया गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने मर्ग कायम कर पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि सांप या जहरीले कीड़े-मकोड़ों के काटने पर झाड़फूंक और अंधविश्वास में समय गंवाने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचें, क्योंकि समय पर इलाज से जान बचाई जा सकती है।

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