बैलाडीला में ड्राइवरों का बिगुल: कम वेतन और शोषण के खिलाफ हड़ताल की चेतावनी, थम सकते हैं पहिए

8 घंटे की जगह 12 घंटे काम, तय वेतन नहीं… ड्राइवर बोले—अब नहीं सहेंगे अन्याय, आर-पार की लड़ाई तय



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पब्लिक स्वर,दंतेवाड़ा/किरंदुल मबैलाडीला। बैलाडीला क्षेत्र में बैलाडीला ड्राइवर वेलफेयर एसोसिएशन ने अब खुलकर मोर्चा खोल दिया है। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित वेतनमान लागू न होने और लगातार शोषण के आरोपों के बीच ड्राइवरों ने हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है। अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो पूरे क्षेत्र में वाहनों के पहिए थम सकते हैं।

ड्राइवर एसोसिएशन का कहना है कि केंद्र सरकार ने 8 घंटे के काम के लिए प्रतिदिन ₹944 (मासिक लगभग ₹24,544) का वेतन तय किया है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। वाहन मालिक ड्राइवरों से 12-12 घंटे काम ले रहे हैं और बदले में तय वेतन से काफी कम भुगतान कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, बढ़ती महंगाई में ओवरटाइम के नाम पर मात्र ₹100 दिए जा रहे हैं, जिसे संगठन ने “मजाक” करार दिया है और इसमें बढ़ोतरी की मांग की है।
संगठन के पदाधिकारियों—राजू कुजाम, सचिन देवा नाग, हुड्डा कुंजाम, पवित्र जाल और सुनील कडती—ने साफ शब्दों में कहा कि ड्राइवरों का लगातार शोषण किया जा रहा है और अब यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि केंद्र के नियम लागू नहीं होते तो हड़ताल किया जाएगा। 

 ड्राइवरों की प्रमुख मांगें:
▪️ ₹944 प्रतिदिन (8 घंटे) का वेतन लागू किया जाए
▪️ अतिरिक्त काम पर उचित ओवरटाइम भुगतान
▪️ ड्राइवरों के शोषण पर तत्काल रोक
 बड़ा सवाल:
अगर हड़ताल होती है, तो क्या बैलाडीला की औद्योगिक और परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी?
अब नजरें वाहन मालिकों और प्रशासन के रुख पर टिकी हैं—क्या समय रहते समाधान निकलेगा या संघर्ष और तेज होगा?



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