14 महीने बाद खत्म हुआ इंतजार: अरुण देव गौतम बने छत्तीसगढ़ के पूर्णकालिक DGP



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पब्लिक स्वर,रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुण देव गौतम को राज्य का पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त कर दिया है। शनिवार को जारी आदेश के साथ ही पिछले 14 महीनों से प्रभारी डीजीपी के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे एडी गौतम अब आधिकारिक रूप से राज्य पुलिस बल के मुखिया बन गए हैं।

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब सुप्रीम कोर्ट ने पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) से जवाब मांगा था। इसके बाद यूपीएससी ने भी छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। इसी बीच राज्य शासन ने आदेश जारी करते हुए अरुण देव गौतम को नियमित डीजीपी नियुक्त कर दिया।

अशोक जुनेजा के रिटायरमेंट के बाद मिली थी जिम्मेदारी

गौरतलब है कि पूर्व डीजीपी अशोक जुनेजा के सेवानिवृत्त होने के बाद राज्य सरकार ने अरुण देव गौतम को प्रभारी डीजीपी की जिम्मेदारी सौंपी थी। तब से वे लगातार पुलिस विभाग का नेतृत्व कर रहे थे। करीब 14 महीने तक प्रभारी पद पर रहने के बाद अब उन्हें पूर्णकालिक नियुक्ति मिल गई है।

1992 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी

अरुण देव गौतम 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के रहने वाले हैं। छत्तीसगढ़ कैडर में उन्हें प्रशासनिक सख्ती, शांत कार्यशैली और रणनीतिक पुलिसिंग के लिए जाना जाता है। वे राज्य में लंबे समय तक गृह सचिव के पद पर भी रह चुके हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा रणनीति, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय को लेकर उनका अनुभव काफी अहम माना जाता है।

अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर मिल चुके सम्मान

अरुण देव गौतम को पुलिस सेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। वर्ष 2002 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन (कोसोवो) के लिए यूएन मेडल मिला। वर्ष 2010 में उन्हें भारतीय पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। वहीं 2018 में उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक प्रदान किया गया।


क्यों अहम मानी जा रही नियुक्ति

छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था, साइबर अपराध, संगठित अपराध और नक्सल चुनौती जैसे मुद्दों के बीच यह नियुक्ति प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंबे समय तक प्रभारी व्यवस्था में चल रहे पुलिस मुख्यालय को अब स्थायी नेतृत्व मिल गया है। इससे पुलिस प्रशासनिक फैसलों और दीर्घकालिक रणनीतियों में स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है।

राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी इस नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और यूपीएससी की प्रक्रिया के बीच सरकार ने स्थायी डीजीपी नियुक्त कर स्पष्ट संदेश दिया है कि राज्य पुलिस नेतृत्व को लेकर अब अनिश्चितता खत्म हो गई है।



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