पब्लिक स्वर,भिलाई/दुर्ग। भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) टाउनशिप के सेक्टर-6 ए मार्केट में नई शराब दुकान खोले जाने को लेकर सियासी और सामाजिक विवाद गहराता जा रहा है। शुक्रवार शाम इस मुद्दे पर युवा कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन करते हुए दुकान में तालाबंदी की कोशिश की, जिससे मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई।
शाम करीब 7 बजे बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस कार्यकर्ता सेक्टर-6 ए मार्केट पहुंचे। उनका उद्देश्य शराब दुकान को बंद कराना और प्रतीकात्मक रूप से तालाबंदी करना था। हालांकि, पहले से तैनात भारी पुलिस बल ने उन्हें दुकान तक पहुंचने से रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। विरोध जताते हुए कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग पर ही ताला जड़ दिया और BSP प्रबंधन व शासन के खिलाफ नारेबाजी की। साथ ही पुतला दहन का भी प्रयास किया गया।
युवा कांग्रेस नेता के. प्रशांत कुमार ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए BSP प्रबंधन और राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से भीड़भाड़ वाले पारिवारिक बाजार में शराब दुकान खोलना गलत है। उनके अनुसार, ऐसे स्थान पर शराब की उपलब्धता से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है और असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की आशंका है।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि स्थानीय व्यापारी भी इस फैसले के खिलाफ हैं। सेक्टर-6 ए मार्केट में कपड़ा, मेडिकल, किताबों और दैनिक उपयोग की दुकानों की भरमार है, जहां रोज बड़ी संख्या में परिवार आते हैं। ऐसे में यहां शराब दुकान खुलने से बाजार के पारंपरिक और पारिवारिक माहौल पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय निवासियों ने भी चिंता जताई है कि अब तक शांत रहने वाला यह बाजार विवादों का केंद्र बन सकता है। लोगों का कहना है कि आबादी वाले इलाकों में लगातार शराब दुकानों का खुलना चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाता है। इस मुद्दे को लेकर हालिया घटनाओं का भी हवाला दिया जा रहा है। कुछ दिन पहले खुर्सीपार स्टेडियम के पास शराब दुकान खोलने पर भी विरोध सामने आया था। अब सेक्टर-6 ए में इसी तरह का फैसला लोगों के लिए हैरानी का कारण बना हुआ है।
युवा कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार सुनियोजित तरीके से रिहायशी और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में शराब दुकानें खोल रही है, जिससे सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हो सकता है। संगठन ने चेतावनी दी है कि जब तक यह दुकान हटाई नहीं जाती, उनका आंदोलन जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर इसे बड़े जनआंदोलन में बदला जाएगा। फिलहाल, प्रशासन और BSP प्रबंधन की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बढ़ते विरोध के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

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