राजनीति
पब्लिक स्वर की खबर का असर: धमतरी में 9 उर्वरक दुकानों की बिक्री पर रोक
पब्लिक स्वर,धमतरी। धमतरी जिले में किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कालाबाजारी, अधिक कीमत पर बिक्री, जमाखोरी और स्टॉक में गड़बड़ी की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद कृषि विभाग ने जिलेभर में उर्वरक विक्रय केंद्रों का सघन और औचक निरीक्षण शुरू किया है।
पब्लिक स्वर द्वारा उर्वरक वितरण में गड़बड़ी और किसानों की परेशानी को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया और निजी उर्वरक दुकानों पर छापेमारी की कार्रवाई तेज कर दी गई। उप संचालक कृषि और उर्वरक निरीक्षकों की संयुक्त टीम ने धमतरी, नगरी, मगरलोड, कुरूद और आसपास के क्षेत्रों में संचालित उर्वरक विक्रय संस्थानों का भौतिक सत्यापन किया।
निरीक्षण के दौरान कई दुकानों में पॉश मशीन (POS) में दर्ज स्टॉक और वास्तविक उपलब्ध उर्वरक के बीच अंतर पाया गया। कुछ विक्रेताओं के स्टॉक रजिस्टर सही तरीके से संधारित नहीं मिले, जबकि कई दुकानों में उर्वरक भंडारण और बिक्री प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। प्रशासन ने इसे किसानों के हितों के खिलाफ मानते हुए तत्काल कार्रवाई की।
कार्रवाई के तहत मेसर्स राजेश ट्रेडर्स धमतरी, कृषक साथी धमतरी, राज इंटरप्राइजेस अर्जुनी, श्री श्याम ट्रेडर्स श्यामतराई, महेन्द्र ट्रेडर्स नगरी, जय किसान ट्रेडर्स नगरी, किसान संगवारी बोरसी मगरलोड, साक्षी कृषि केंद्र परसवानी और मानिक ट्रेडर्स मगरलोड सहित कुल 9 उर्वरक विक्रय केंद्रों की बिक्री तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दी गई है।
इसके अलावा विकासखंड मगरलोड, कुरूद और धमतरी के विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण के दौरान अनियमितताएं पाए जाने पर मेसर्स छत्तीसगढ़ खाद भंडार सांकरा, प्रेम कृषि केंद्र मगरलोड, किसान ट्रेडर्स कुरूद, देवांगन कृषि केंद्र कोकड़ी, कुणाल कृषि केंद्र कोलियारी और देवांगन ट्रेडर्स रत्नाबांधा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। संबंधित संस्थानों को निर्धारित समय सीमा में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने साफ किया है कि उर्वरकों की कालाबाजारी, अधिक कीमत पर बिक्री या जमाखोरी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जांच में विक्रेता दोषी पाए जाते हैं तो उनके लाइसेंस निलंबित या निरस्त किए जा सकते हैं। इसके साथ ही आवश्यक वस्तु अधिनियम और उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत भी वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले उर्वरकों की मांग बढ़ने लगती है। ऐसे समय में कई व्यापारी कृत्रिम कमी पैदा कर अधिक मुनाफा कमाने की कोशिश करते हैं। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ता है, जिन्हें या तो निर्धारित दर से अधिक कीमत चुकानी पड़ती है या समय पर उर्वरक नहीं मिल पाता। ऐसे में प्रशासन की यह कार्रवाई किसानों के हित में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
किसानों की सुविधा के लिए जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है, जहां उर्वरक से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं। मैदानी स्तर पर उर्वरक निरीक्षक दलों की तैनाती कर निरंतर निगरानी और औचक निरीक्षण सुनिश्चित किए जा रहे हैं।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे उर्वरक खरीदते समय पक्का बिल जरूर लें, निर्धारित दर से अधिक भुगतान न करें और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी दिखाई देने पर तुरंत प्रशासन को सूचना दें। विभाग का कहना है कि किसानों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी, ताकि किसी भी किसान को उर्वरक की कमी या अधिक कीमत की समस्या का सामना न करना पड़े।