पब्लिक स्वर,बचेली/दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा जिले के बचेली क्षेत्र स्थित डिपॉजिट-04 (चार नंबर खदान) को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। खदान क्षेत्र के निरीक्षण के बाद जनप्रतिनिधियों को एनएमडीसी चेक पोस्ट पर रोकने की घटना अब केवल सुरक्षा जांच तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पूरे खनन परियोजना की वैधता, पारदर्शिता और स्थानीय सहभागिता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
राज्यपाल के नाम ज्ञापन देने के बावजूद काम चालू
जानकारी के अनुसार, प्रभावित गांवों के सरपंचों एवं जनप्रतिनिधियों का एक दल शनिवार को डिपॉजिट-04 खदान क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंचा था। निरीक्षण के बाद लौटते समय एनएमडीसी चेक पोस्ट पर उन्हें रोक लिया गया। इस दौरान कुछ अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों पर पोकलेन मशीनों की चाबी ले जाने का आरोप लगाया गया। हालांकि जनप्रतिनिधियों ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी मशीन या सरकारी संपत्ति को हाथ तक नहीं लगाया।
घटना के दौरान माहौल तब और गर्म हो गया जब जनप्रतिनिधियों ने मौके पर मौजूद एनसीएल/एनएमडीसी अधिकारियों से सीधे सवाल पूछने शुरू कर दिए। उन्होंने कहा कि यदि परियोजना से जुड़े सभी दस्तावेज और स्वीकृतियां नियमों के अनुरूप हैं, तो फिर फॉरेस्ट क्लीयरेंस, पर्यावरणीय अनुमति और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है।
जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों से पूछा कि क्या परियोजना के विस्तार से पहले प्रभावित ग्रामीणों की सहमति लेने के लिए विधिवत जनसुनवाई और लोक सुनवाई आयोजित की गई थी? यदि हुई थी तो उसकी जानकारी और दस्तावेज ग्रामीणों के सामने क्यों नहीं रखे गए?
इस दौरान उन्होंने विकास के दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि खदान विस्तार क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक है, तो पिछले 50 से 60 वर्षों में स्थानीय गांवों को अपेक्षित विकास क्यों नहीं मिला। जनप्रतिनिधियों का कहना था कि क्षेत्र के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं और ऐसे में विकास के नाम पर खनन विस्तार को लेकर ग्रामीणों में कई शंकाएं हैं।
घटना की सूचना मिलते ही भांसी पुलिस, बचेली पुलिस तथा सीआईएसएफ के जवान मौके पर पहुंचे। काफी देर तक चली पूछताछ और बातचीत के बाद सभी जनप्रतिनिधियों को जाने दिया गया। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में नई बहस छेड़ दी है।
अब यह मामला केवल चेक पोस्ट पर हुई रोक-टोक का नहीं, बल्कि खनन परियोजना की पारदर्शिता, पर्यावरणीय स्वीकृतियों, जनसुनवाई की प्रक्रिया और स्थानीय समुदाय की भागीदारी से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस विषय पर जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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