सड़क-पुल निर्माण में देरी पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव नाराज, दो ठेकेदारों का पंजीयन किया निरस्त, 8 को थमाया नोटिस



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पब्लिक स्वर,रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर संभाग में सड़कों और पुलों के निर्माण कार्यों में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के निर्देश के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) ने धीमी प्रगति वाले दो ठेकेदारों का पंजीयन दो वर्षों के लिए निरस्त कर दिया है, जबकि आठ अन्य ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विभाग ने कुछ मामलों में आगे की कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंताओं से प्रतिवेदन भी मांगा है।

बस्तर दौरे के बाद बढ़ी सख्ती

पिछले सप्ताह अरुण साव ने चार दिनों तक बस्तर संभाग का दौरा कर सड़क, पुल और अन्य अधोसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा की थी। निरीक्षण के दौरान कई निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा और स्वीकृत निर्माण कार्यक्रम से पीछे पाए गए। इस पर उन्होंने अधिकारियों और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट कहा था कि गुणवत्ता और समय-सीमा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसी समीक्षा के बाद विभाग ने लंबित और धीमी गति से चल रहे कार्यों पर कार्रवाई तेज कर दी है।

दो ठेकेदारों का पंजीयन दो साल के लिए निरस्त

लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता ने मेसर्स गुप्ता कंस्ट्रक्शन कंपनी का पंजीयन दो वर्षों के लिए निरस्त कर दिया है। कंपनी कोंडागांव और कबीरधाम जिलों में चार उच्च स्तरीय पुलों और पहुंच मार्गों के निर्माण कार्य कर रही थी। विभाग के अनुसार इन परियोजनाओं की प्रगति अपेक्षित स्तर से काफी पीछे पाई गई। इसी तरह निर्भय राम साहू का पंजीयन भी दो वर्षों के लिए रद्द कर दिया गया है। कांकेर जिले में नेरूल नदी और डुमरीकेल नाला पर बन रहे पुलों के कार्यों में लगातार देरी और बार-बार चेतावनी के बावजूद संतोषजनक प्रगति नहीं मिलने के कारण यह कार्रवाई की गई।

कुछ मामलों में रिपोर्ट तलब

विभाग ने नारायणपुर-सोनपुर-मरोदा मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुधार कार्य के ठेकेदार पंकज हालदार और सुकमा जिले की दो सड़क परियोजनाओं के ठेकेदार आशीष भदौरिया के खिलाफ पूर्व में जारी कारण बताओ नोटिसों के जवाब का परीक्षण किया है। अब आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित मुख्य अभियंताओं से प्रतिवेदन मांगा गया है।

आठ ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस

विभाग ने कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में निर्धारित माइलस्टोन पूरे नहीं होने और निर्माण कार्यक्रम से पीछे चल रहे कार्यों को लेकर आठ ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें कांकेर, कोंडागांव, जगदलपुर और सुकमा की प्रमुख सड़क परियोजनाएं शामिल हैं। नोटिस प्राप्त करने वालों में मेसर्स बीएमएस प्रोजेक्ट, मेसर्स सुराना एंड कंपनी, मेसर्स एसके अरोरा, के. मोहन रेड्डी, ट्रांससॉफ्ट इन्फ्रा, मेसर्स राघव कंस्ट्रक्शन, मेसर्स बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर और गोविंद्र सिंह देशमुख शामिल हैं।

केशलूर रेलवे ओवरब्रिज पर भी विभाग की नजर

लोक निर्माण विभाग ने 10 जून को राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर केशलूर के पास निर्माणाधीन फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज परियोजना के ठेकेदार मेसर्स अशोक कुमार मित्तल को भी नोटिस जारी किया था। विभाग के अनुसार परियोजना की प्रगति स्वीकृत निर्माण कार्यक्रम और तय माइलस्टोन के अनुरूप नहीं पाई गई।

सरकार का संदेश: देरी बर्दाश्त नहीं

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि सड़क और पुल निर्माण कार्यों में गुणवत्ता तथा समयबद्धता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। निर्धारित समय पर परियोजनाएं पूरी नहीं होने से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और क्षेत्रीय विकास प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि बस्तर में बेहतर कनेक्टिविटी के लिए निर्माणाधीन परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना जरूरी है। इसलिए अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?

बस्तर संभाग में सड़क और पुल परियोजनाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था से सीधे जुड़ी हुई हैं। लंबे समय से कई परियोजनाओं के अधूरे रहने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में सरकार की यह कार्रवाई न केवल ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने का प्रयास है, बल्कि अधोसंरचना परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने का संदेश भी देती है।



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