भारी वाहन चालकों के लाइसेंस में गड़बड़ी की शिकायत, बाबा ट्रेवल्स पर संयुक्त टीम की दबिश



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पब्लिक स्वर,रायगढ़। सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए रायगढ़ पुलिस ने फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस के संभावित नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई शुरू की है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देश पर पुलिस, परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की संयुक्त टीम ने शहर की बाबा ट्रेवल्स नामक एजेंसी में दबिश देकर दस्तावेजों की जांच की।

जानकारी के अनुसार, बीते 17 अप्रैल 2026 को नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा की अध्यक्षता में पुलिस कंट्रोल रूम में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के ट्रांसपोर्टरों व वाहन मालिकों की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में सड़क सुरक्षा को लेकर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और संयुक्त जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए थे।

इसी क्रम में पुलिस को शिकायत मिली कि कुछ नवसीखिया चालक भारी वाहनों के लिए जारी लाइसेंस का उपयोग कर रहे हैं। साथ ही 11 जून को प्राप्त एक लिखित शिकायत में आरोप लगाया गया कि स्थानीय स्तर पर संचालित बाबा ट्रेवल्स द्वारा ओडिशा एवं अन्य राज्यों के लोगों के लिए कथित रूप से फर्जी और भ्रामक दस्तावेज तैयार कर उन्हें रायगढ़ का निवासी दर्शाते हुए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाए जा रहे हैं।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी के निर्देश पर सीएसपी मयंक मिश्रा और यातायात डीएसपी उत्तम प्रताप सिंह के नेतृत्व में आरटीओ एवं यातायात पुलिस की संयुक्त टीम ने एजेंसी में जांच की। जांच के दौरान कई आवेदकों के दस्तावेजों में एक जैसे पते पाए गए। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि बाहरी राज्यों के आवेदकों के लिए स्थानीय स्तर पर किरायानामा और शपथ-पत्र तैयार कर उन्हें रायगढ़ का निवासी दर्शाते हुए लाइसेंस के लिए आवेदन कराया गया। जांच टीम को यह भी आशंका है कि कुछ मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया के दौरान वास्तविक आवेदकों की जगह अन्य व्यक्तियों को परीक्षण में शामिल कर लाइसेंस जारी कराए गए हो सकते हैं।

फिलहाल पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीम करीब 180 लाइसेंसधारियों के दस्तावेजों की विस्तृत जांच और सत्यापन कर रही है। दस्तावेजों, निवास प्रमाण पत्रों और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया से जुड़े अभिलेखों का परीक्षण किया जा रहा है।

पुलिस का कहना है कि यदि जांच में फर्जीवाड़ा, नियमों का उल्लंघन या किसी एजेंसी की संलिप्तता प्रमाणित होती है, तो संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य सड़क सुरक्षा मानकों को मजबूत करना और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारी वाहन चलाने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।



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