पब्लिक स्वर,महासमुंद। महासमुंद जिला अस्पताल से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पैर में मामूली दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे तीन साल के मासूम लक्ष्य की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार चिकित्सकों पर कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, खल्लारी थाना क्षेत्र के ग्राम चरौदा निवासी सतवन बांधे अपने तीन वर्षीय पुत्र लक्ष्य को 28 अप्रैल की सुबह पैर में दर्द की शिकायत के चलते जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में मौजूद डॉक्टर ने प्रारंभिक जांच के बाद बच्चे का एक्स-रे और खून चढ़ाने की सलाह दी, लेकिन इसके बाद इलाज की प्रक्रिया में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई।
आरोप है कि बच्चे का एक्स-रे और खून की जांच रात करीब 11 बजे की गई, जबकि पूरे दिन उसकी स्थिति पर समुचित ध्यान नहीं दिया गया। परिजनों के मुताबिक, पूरी रात मासूम दर्द से कराहता रहा, लेकिन न तो डॉक्टरों ने नियमित मॉनिटरिंग की और न ही स्टाफ ने जरूरी उपचार उपलब्ध कराया। अस्पताल कर्मचारियों का रवैया उदासीन और गैर-जिम्मेदाराना बताया जा रहा है।
सुबह तक बच्चे की हालत बिगड़ती चली गई और अंततः उसने दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को सीधे तौर पर इस मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
परिजनों ने अस्पताल अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित इलाज और निगरानी मिलती, तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।
यह घटना न केवल अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठाती है, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता और जवाबदेही को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा करती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।

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