पब्लिक स्वर,दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा जिले के सुदूर वनांचल ग्राम छिंदनार में क्रिकेट के महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर का दौरा बस्तर में हो रहे बदलाव की एक मजबूत तस्वीर बनकर सामने आया है। जिस बस्तर को कभी नक्सल प्रभाव और भय के कारण जाना जाता था, वहां अब खेल, विकास और नई उम्मीदों की गूंज सुनाई दे रही है। सचिन का यहां पहुंचना सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह संकेत है कि यह क्षेत्र अब तेजी से मुख्यधारा की ओर बढ़ रहा है।
सचिन तेंदुलकर ‘सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन’ और ‘माणदेशी फाउंडेशन’ के संयुक्त प्रयास ‘मैदान कप अभियान’ के तहत छिंदनार पहुंचे थे। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में बच्चों के लिए बेहतर और आधुनिक खेल मैदान उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपनी प्रतिभा को निखार सकें। लंबे समय से संसाधनों की कमी से जूझ रहे इस क्षेत्र के बच्चों के लिए यह पहल एक बड़ा अवसर बनकर सामने आई है।
छिंदनार में सचिन का स्वागत पारंपरिक तरीके से किया गया। उन्होंने बच्चों के साथ समय बिताया, उनके साथ क्रिकेट खेला और उन्हें खेल के साथ-साथ जीवन में अनुशासन और मेहनत का महत्व समझाया। मास्टर ब्लास्टर को अपने बीच पाकर बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। कई ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि सचिन तेंदुलकर जैसे महान खिलाड़ी उनके गांव तक पहुंचेंगे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस दौरे को बस्तर के बदलते स्वरूप का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि अब यह क्षेत्र भय की छाया से बाहर निकलकर विकास और आत्मविश्वास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार खेल को युवाओं के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हुए ऐसे प्रयासों को बढ़ावा दे रही है, जिससे जनजातीय क्षेत्रों के बच्चे भी बड़े मंच तक पहुंच सकें।
सचिन तेंदुलकर के इस दौरे ने बस्तर की छवि को सकारात्मक रूप से प्रस्तुत किया है। यह संदेश गया है कि यह क्षेत्र अब संघर्ष की पहचान से आगे बढ़कर संभावनाओं और अवसरों की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। छिंदनार में बिताया गया यह समय वहां के बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है और यह पहल आने वाले समय में बस्तर को खेल के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकती है।

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