पब्लिक स्वर,रायपुर। रायपुर के वीआईपी रोड स्थित करेंसी टावर में सोमवार सुबह एक गंभीर तकनीकी और सुरक्षा चूक सामने आई, जब छत्तीसगढ़ शासन की अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) ऋचा शर्मा लिफ्ट में फंस गईं। यह घटना सुबह करीब 6:30 बजे की बताई जा रही है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी लगभग 10 मिनट तक लिफ्ट के भीतर बंद रहीं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लिफ्ट के अंदर न पर्याप्त रोशनी थी और न ही वेंटिलेशन की व्यवस्था, जिससे स्थिति तेजी से तनावपूर्ण हो गई। सीमित ऑक्सीजन और अंधेरे के कारण ACS को घबराहट होने लगी और वे मानसिक दबाव में आ गईं। यह स्थिति किसी भी व्यक्ति के लिए गंभीर हो सकती थी, खासकर तब जब इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम पूरी तरह अनुपस्थित हो।
सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि लिफ्ट में न तो इमरजेंसी अलार्म सिस्टम काम कर रहा था और न ही कोई हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध था। ऐसे में मदद पहुंचने में देरी होना स्वाभाविक था। सूत्रों के मुताबिक, ACS ने अपने मोबाइल फोन के जरिए प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी, जिसके बाद तत्काल हलचल मची और रेस्क्यू प्रक्रिया शुरू हुई।
घटना की जानकारी मिलते ही तेलीबांधा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। तकनीकी टीम की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद लिफ्ट का दरवाजा खोला गया। बाहर निकलने के बाद ACS की स्थिति असहज बताई गई और उन्हें सामान्य होने में कुछ समय लगा।
इस घटना ने करेंसी टावर की समग्र सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब यहां लिफ्ट फंसी हो। पूर्व में भी कई लोग ऐसी स्थिति का सामना कर चुके हैं, जिनमें कुछ मामलों में लोगों की तबीयत बिगड़ने तक की नौबत आई थी। बावजूद इसके, प्रबंधन द्वारा अब तक कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए हैं।
टावर की सातवीं मंजिल पर संचालित SAICUS जिम में रोजाना बड़ी संख्या में लोग और अधिकारी आते हैं, जिससे इस इमारत की उपयोगिता और भी बढ़ जाती है। ऐसे में लिफ्ट जैसी बुनियादी सुविधा का बार-बार फेल होना सीधे तौर पर लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन जाता है।
तकनीकी और प्रशासनिक मानकों के अनुसार, किसी भी बड़े व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में इमरजेंसी अलार्म, बैकअप पावर, पर्याप्त लाइटिंग, वेंटिलेशन और 24x7 रेस्क्यू मैकेनिज्म अनिवार्य होते हैं। लेकिन करेंसी टावर में इन मानकों के अनुपालन को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। 850 के करीब दुकान और ऑफिस स्पेस वाले इस बड़े कॉम्प्लेक्स में मात्र 4 लिफ्ट का होना भी भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा दृष्टि से अपर्याप्त माना जा रहा है।
घटना के बाद अब नगर निगम, फायर सेफ्टी विभाग और अन्य नियामक एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह देखना अहम होगा कि इस मामले में तकनीकी जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है या फिर इसे भी अन्य घटनाओं की तरह नजरअंदाज कर दिया जाएगा।

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