पब्लिक स्वर,दंतेवाड़ा - बचेली। भारत की नवरत्न कंपनी एनएमडीसी (NMDC) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 53 मिलियन टन उत्पादन और प्रेषण का जादुई आंकड़ा पार कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बीच, संयुक्त खदान मज़दूर संघ (SKMS - एटक) ने प्रबंधन का ध्यान उन हाथों की ओर खींचा है जिन्होंने इस सफलता की गोल्डन लेख लिखी है।
शनिवार को SKMS शाखा बचेली के अध्यक्ष कॉ. रवि मिश्रा, सचिव कॉ. जागेश्वर प्रसाद व टीम ने अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (CMD) के नाम एक विस्तृत मांग पत्र सौंपकर श्रमिकों के हितों में 10 प्रमुख बिंदुओं पर तत्काल निर्णय लेने का आग्रह किया।
ठेका श्रमिकों के लिए ऐतिहासिक पहल यूनियन ने एक बार फिर अपनी उस नीति को दोहराया है जिसमें नियमित और ठेका श्रमिकों के बीच कोई भेद नहीं किया जाता। भले ही नियमित कर्मचारियों का वेतन समझौता स्टील मिनिस्ट्री के स्तर पर प्रक्रियाधीन है, लेकिन यूनियन ने "मजदूर-मजदूर, भाई-भाई" के संकल्प को चरितार्थ करते हुए ठेका श्रमिकों के नए वेतन समझौते की मांग को प्रमुखता से रखा है। यूनियन का स्पष्ट तर्क है कि ठेका श्रमिकों का समझौता स्थानीय स्तर पर प्रबंधन के साथ बैठकर संपन्न किया जा सकता है, जिससे लगभग 3,000 परिवारों के जीवन में खुशहाली आएगी।
मांग पत्र के मुख्य बिंदु है,
प्रोत्साहन:53 मिलियन टन उत्पादन की खुशी में प्रत्येक कर्मचारी को 50 ग्राम सोने का सिक्का और स्मृति चिन्ह।
वेतन व पदोन्नति: 01.01.2022 से लंबित वेतन समझौता लागू करना और "लाइन ऑफ प्रमोशन" (LOP) हेतु शीघ्र बैठक।
महारत्न का तोहफा: कंपनी को महारत्न दर्जा मिलने के उपलक्ष्य में कर्मचारियों को तीन वेतन वृद्धि (Increments) का लाभ।
स्वास्थ्य सुरक्षा: ठेका श्रमिकों के लिए तत्काल ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस लागू करना।
भर्ती प्रक्रिया: वैधानिक रिक्त पदों को विभागीय माध्यम से भरना और फील्ड अटेंडेंट (L-1) व मेंटेनेंस असिस्टेंट (L-2) की भर्ती पूर्ण करना।
सुविधाएं: रायपुर के लिए बस सेवा शुरू करना और अपोलो अस्पताल के संविदा कर्मियों को स्थायी करना।
जमीनी संघर्ष की पहचान है SKMS
आज SKMS यूनियन की पहचान एक ऐसी संस्था के रूप में है जो सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर मजदूर हितों के लिए संघर्ष करती आई है। एनएमडीसी में आज ठेका श्रमिकों को जो भी सुविधाएं मिल रही हैं, उनमें SKMS की भूमिका निर्णायक रही है। यूनियन ने हमेशा प्रबंधन के साथ बेहतर तालमेल बनाकर ठेका श्रमिकों को न केवल आर्थिक लाभ पहुंचाया, बल्कि उन्हें कार्यस्थल पर "समान सम्मान" का दर्जा भी दिलवाया है।
सचिव कॉ. जागेश्वर प्रसाद का संदेश दिया कि, "ठेका श्रमिक एनएमडीसी की रीढ़ की हड्डी हैं। आज हर विभाग में वे कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। हमने दो दिन पूर्व भी सीएमडी के आगमन पर इन मांगों को रखा था। अब नज़र प्रबंधन की पहल में है। हम देखना चाहते हैं कि प्रबंधन इन कर्मठ श्रमिकों के महत्व को कितनी प्राथमिकता देता है।"
इस मांग पत्र के बाद अब श्रमिकों की निगाहें प्रबंधन की ओर टिकी हैं। यूनियन ने स्पष्ट कर दिया है कि 100 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य तभी संभव है जब कर्मचारियों का मनोबल ऊंचा रहे और उन्हें उनके पसीने की सही कीमत मिले।

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