पब्लिक स्वर,बिजनेस/ भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो (IndiGo) को आगामी महीनों में भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ सकता है। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी के एविएशन बीमा प्रीमियम में 30% से 50% तक की बढ़ोतरी संभव है। इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं — हाल ही में हुआ एयर इंडिया विमान हादसा और ईरान-इज़राइल संघर्ष से उपजा वैश्विक बीमा अस्थिरता।
$20 अरब का बीमा दायरा, $15 मिलियन सालाना प्रीमियम
मार्च 2025 तक इंडिगो के पास 437 विमानों का बेड़ा था, जिनमें अधिकतर Airbus A320 और A321 शामिल हैं।
प्रत्येक विमान की बीमा वैल्यू: $30–$45 मिलियन
कुल बीमा कवरेज: लगभग $20 बिलियन
वार्षिक बीमा प्रीमियम: $14–15 मिलियन
यह बीमा न्यू इंडिया एश्योरेंस के नेतृत्व में तैयार किया गया है, जिसमें ICICI लोम्बार्ड जैसी घरेलू कंपनियां शामिल हैं। Reinsurance का कार्य लंदन मार्केट में किया गया था।
एयर इंडिया क्रैश ने बढ़ाया जोखिम मूल्यांकन
अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे के कारण अब इंश्योरेंस कंपनियों को अनुमानित $120–200 मिलियन का क्लेम चुकाना पड़ सकता है, जो भारत का सबसे बड़ा एविएशन इंश्योरेंस पेआउट बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह क्लेम ग्लोबल बीमाकर्ताओं तक पहुंचता है, तो भारत जैसे उभरते बाजारों में प्रीमियम दरें और जोखिम मूल्यांकन तेजी से बढ़ सकता है।
भू-राजनीतिक संकट ने War Insurance को महंगा किया
ईरान-इज़राइल तनाव के चलते कई उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा है।
बीमाकर्ता ऐसे में "War Risk Premium" स्वतः ही बढ़ा देते हैं।
War Insurance में सिर्फ 7 दिन की कैंसलेशन क्लॉज़ होती है, जिससे यह कभी भी समाप्त किया जा सकता है।
इन स्थितियों में भारत की सभी प्रमुख एयरलाइनों को विमानों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त लागत वहन करनी पड़ सकती है।
बीमा दावे और कानूनी दबाव
हाउडेन इंडिया इंश्योरेंस के CEO अमित अग्रवाल के अनुसार, एयर इंडिया हादसे के बाद यात्रियों को मुआवज़ा Montreal Convention के तहत मिलेगा, लेकिन यह उनकी नागरिकता और केस की प्रकृति पर निर्भर करेगा।
वहीं, GIC Re के चेयरमैन एन. रामास्वामी का कहना है कि इतने बड़े क्लेम से री-इंश्योरेंस मार्केट की रेटिंग और क्षमता प्रभावित होगी, जिससे भविष्य में बीमा कवर पाना महंगा और मुश्किल हो सकता है।
इंडिगो के पास क्या विकल्प हैं?
1. प्रीमियम पर पुनः वार्ता: लंदन मार्केट में नए रेट पर रिन्यूअल की प्रक्रिया
2. पुराने विमान हटाना: कम बीमा लागत के लिए बेड़े में बदलाव
3. जोखिम वाले रूट्स से बचाव: वॉर ज़ोन से उड़ानों का अस्थायी निष्कासन
टिकट महंगे होने का खतरा
अगर बीमा प्रीमियम में यह अनुमानित वृद्धि होती है, तो एयरलाइन संचालन लागत में सीधा असर पड़ेगा। इसका भार अंततः यात्रियों पर पड़ेगा — जिससे एयर टिकट की कीमतें, फ्लाइट क्षमता और यात्रा सुरक्षा शुल्क सब प्रभावित हो सकते हैं।

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