पब्लिक स्वर,रायपुर। छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों द्वारा सीजी बोर्ड की मान्यता लेकर खुद को CBSE पैटर्न बताकर मोटी फीस वसूली का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। इस पूरे खेल का खुलासा पब्लिक स्वर की टीम ने अपने स्टिंग ऑपरेशन में किया, जिसमें दिखाया गया कि किस तरह स्कूल संचालक अभिभावकों को गुमराह कर नियमों के विपरीत वसूली कर रहे हैं।
स्टिंग ऑपरेशन में सामने आया कि कई निजी स्कूल सीजी बोर्ड से मान्यता प्राप्त होने के बावजूद खुद को “CBSE पैटर्न” बताकर प्रवेश के समय ही अधिक फीस तय कर रहे हैं। अभिभावकों को यह भरोसा दिलाया जाता है कि बच्चों को CBSE स्तर की पढ़ाई कराई जा रही है, जबकि हकीकत में न तो वे CBSE से संबद्ध हैं और न ही निर्धारित पाठ्यक्रम का पालन किया जा रहा है। इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन द्वारा निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें और तय दुकानों से ड्रेस खरीदने का दबाव भी बनाया जाता है।
इस खुलासे के बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी संभागीय संयुक्त संचालकों को निर्देश जारी कर निजी स्कूलों की पिछले तीन वर्षों की फीस और पाठ्यक्रम व्यवस्था की रिपोर्ट तलब की है। विभाग यह जांच कर रहा है कि किन स्कूलों ने नियमों के खिलाफ जाकर फीस निर्धारण और किताबों की अनिवार्यता लागू की।
शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस मामले को गंभीर धोखाधड़ी बताते हुए कहा है कि CG बोर्ड की मान्यता में CBSE पैटर्न बताना अपराध है और ऐसे स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई के साथ एफआईआर दर्ज की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि CG बोर्ड स्कूलों में केवल SCERT की किताबें ही अनिवार्य होंगी और बाहरी प्रकाशकों के नाम पर चल रही मनमानी पर रोक लगेगी।
राज्य में 57 हजार से अधिक स्कूलों में से करीब 6,800 निजी स्कूल हैं, जिनमें बड़ी संख्या CG बोर्ड से जुड़े हैं। इसके बावजूद सैकड़ों स्कूल खुद को CBSE पैटर्न बताकर फीस वसूल रहे हैं। पहले भी 1,784 ऐसे स्कूल चिन्हित किए जा चुके हैं, जिन्होंने सरकारी मुफ्त किताबें नहीं लीं और छात्रों को महंगी किताबें खरीदने पर मजबूर किया।
मामला हाईकोर्ट में भी पहुंच चुका है, जहां दायर जनहित याचिका में करीब 2,000 फर्जी CBSE स्कूलों के संचालन का दावा किया गया है। अभिभावकों का कहना है कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, जिससे स्कूल संचालकों के हौसले बढ़ते गए। अब स्टिंग ऑपरेशन के बाद प्रशासनिक सक्रियता बढ़ी है। यदि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी होती है और दोषियों पर कार्रवाई होती है, तो इससे न केवल अभिभावकों को राहत मिलेगी बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो सकेगी।

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