पब्लिक स्वर,रायपुर। छत्तीसगढ़ में आगामी जनगणना कार्य को लेकर शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा जोर पकड़ने लगा है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने जनगणना ड्यूटी में लगाए जाने वाले कर्मचारियों के लिए 1 करोड़ रुपए के दुर्घटना बीमा कवर की मांग उठाई है। इस संबंध में संगठन ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, जनगणना आयुक्त और स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र सौंपकर निर्वाचन ड्यूटी की तर्ज पर बीमा सुविधा लागू करने की अपील की है।
एसोसिएशन का तर्क है कि जनगणना एक राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण कार्य है, जिसमें कर्मचारियों को घर-घर जाकर डेटा संग्रह करना होता है। इस दौरान उन्हें कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है—जैसे सड़क दुर्घटनाएं, स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियां और कई बार असामयिक मौत तक की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक हो जाता है।
चुनावी ड्यूटी जैसी जोखिमपूर्ण परिस्थितियां
संगठन ने स्पष्ट किया कि जनगणना कार्य की प्रकृति और चुनौतियां काफी हद तक चुनावी ड्यूटी जैसी ही हैं। चुनाव के दौरान कर्मचारियों को बीमा कवर और अन्य सुरक्षा सुविधाएं दी जाती हैं, जबकि जनगणना में वैसी व्यवस्था नहीं है। इसे “समान जोखिम, समान सुरक्षा” के सिद्धांत के खिलाफ बताया गया है।
तीन प्रमुख आधारों पर मांग
टीचर्स एसोसिएशन ने अपनी मांग को तीन मुख्य तर्कों के आधार पर रखा है—
समान जोखिम, समान सुरक्षा: जनगणना कार्य में भी चुनाव जैसी ही परिस्थितियां और खतरे मौजूद हैं, इसलिए सुरक्षा मानकों में भेदभाव नहीं होना चाहिए।
आर्थिक संबल: ड्यूटी के दौरान दुर्घटना, गंभीर बीमारी या मृत्यु की स्थिति में परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए।
मानसिक निश्चिंतता: बीमा कवर मिलने से कर्मचारी बिना डर और तनाव के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकेंगे।
पूर्व घटनाओं का हवाला
एसोसिएशन ने जनगणना और अन्य शासकीय कार्यों के दौरान शिक्षकों की हुई मौतों और दुर्घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था की कमी को उजागर करती हैं। इन मामलों ने बीमा कवर की आवश्यकता को और अधिक गंभीर बना दिया है।
अधिसूचना के साथ ही दिशा-निर्देश जारी करने की मांग
संगठन ने यह भी मांग की है कि जैसे ही जनगणना की आधिकारिक अधिसूचना जारी हो, उसी के साथ बीमा संबंधी स्पष्ट दिशा-निर्देश भी जारी किए जाएं। इससे जमीनी स्तर पर कार्यरत हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय पर सुरक्षा मिल सकेगी।
इस मांग को प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान सहित संगठन के अन्य पदाधिकारियों का समर्थन प्राप्त है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस प्रस्ताव पर क्या निर्णय लेती है और क्या जनगणना ड्यूटी को भी चुनावी ड्यूटी की तरह सुरक्षा कवच मिल पाता है।

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