पब्लिक स्वर,अभनपुर/रायपुर। अभनपुर तहसील के ग्राम टेकारी में जमीन की रजिस्ट्री में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां एक मृत व्यक्ति की जगह दूसरे व्यक्ति को खड़ा कर जमीन की रजिस्ट्री कराए जाने का मामला उजागर हुआ है। इस पूरे प्रकरण ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, शारदा वर्मा द्वारा अपने पुत्र गुलाब वर्मा के नाम वर्ष 2018-19 में वसीयत की गई थी। लेकिन गुलाब वर्मा की 24 फरवरी 2024 को मृत्यु हो चुकी थी। भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 105 के अनुसार यदि वसीयत प्राप्तकर्ता वसीयतकर्ता से पहले ही मृत्यु को प्राप्त हो जाए, तो वसीयत स्वतः निष्प्रभावी हो जाती है।
इसके बावजूद तत्कालीन तहसीलदार सत्येंद्र शुक्ला ने दो बार आवेदन यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि वसीयत प्राप्तकर्ता की मृत्यु हो चुकी है। लेकिन वर्तमान तहसीलदार सृजन सोनकर ने सभी रिकॉर्ड और ऑनलाइन प्रविष्टियों को नजरअंदाज करते हुए जमीन को मृतक के वारिसानों के नाम चढ़ाने का आदेश पारित कर दिया।
पूरा घटनाक्रम ऐसे हुआ उजागर
टेकारी गांव की लगभग एक एकड़ भूमि (खसरा नंबर 223/1 और 645/1) पहले से बोधनी वर्मा एवं शारदा वर्मा के नाम पर दर्ज थी। शारदा वर्मा की मृत्यु 23 अप्रैल 2021 को हो चुकी थी। दस्तावेजों के अनुसार, 24 जून 2025 को इसी जमीन की रजिस्ट्री अन्नू तारक के नाम कर दी गई। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस व्यक्ति की मृत्यु 2021 में हो चुकी थी, उसे जीवित बताकर वर्ष 2025 में रजिस्ट्री कराई गई। इसके बाद मात्र दो सप्ताह के भीतर 3 जुलाई 2025 को अन्नू तारक ने उक्त जमीन कौशल और कपिल तरवानी को बेच दी। वही दूसरी ओर 20 नवंबर 2025 को तहसीलदार के आदेश पर गुलाब वर्मा के वारिसों के नाम जमीन चढ़ा दी गई।
रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ी
वर्तमान स्थिति यह है कि— ऑनलाइन रिकॉर्ड में जमीन कौशल और कपिल तरवानी के नाम दर्ज है। जबकि मैनुअल (पटवारी) रिकॉर्ड में जमीन वर्मा परिवार के नाम दर्ज बताई जा रही है। पटवारी रिकॉर्ड में पहले से उल्लेख था कि ऑनलाइन और ऑफलाइन रिकॉर्ड में नाम अलग-अलग हैं, इसके बावजूद बिना समुचित जांच के आदेश पारित कर दिया गया।
अफसरों की भूमिका पर सवाल
पूरे प्रकरण में यह स्पष्ट हो रहा है कि— दस्तावेजों की विधिवत जांच नहीं की गई, कानून की धाराओं की अनदेखी की गई, मृत व्यक्ति को जीवित बताकर रजिस्ट्री कराई गई इसके साथ ही रिकॉर्ड में भारी विरोधाभास होने के बावजूद आदेश पारित किया गया। जिसके बाद अब यह मामला राजस्व विभाग में चर्चा का विषय बन गया है और उच्च अधिकारियों द्वारा जांच की मांग तेज हो गई है।
जांच की उठी मांग
पीड़ित पक्ष ने कलेक्टर एवं उच्च राजस्व अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े बड़े संगठित फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है।

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