पब्लिक स्वर,बालोद। बालोद जिले के गुंडरदेही क्षेत्र में बोर खनन को लेकर सामने आया फर्जी दस्तावेज का मामला न केवल एक आपराधिक कृत्य है, बल्कि यह प्रशासनिक प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। एसडीएम कार्यालय के नाम से तैयार किए गए कथित अनुमति पत्र में शासकीय सील, हस्ताक्षर और आवक-जावक क्रमांक तक अंकित किए गए थे, जिससे यह पहली नजर में पूरी तरह वास्तविक प्रतीत हो।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ग्राम गोड़ेला निवासी जनक लाल साहू पर इस फर्जी दस्तावेज को तैयार करने और उसके आधार पर 5 अप्रैल को बोर खनन कराने का आरोप है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब शासन द्वारा बिना अनुमति बोर खनन पर सख्त प्रतिबंध लागू है। नियमों के तहत केवल विशेष परिस्थितियों में ही एसडीएम कार्यालय से अनुमति दी जाती है, वह भी विस्तृत जांच के बाद।
इस पूरे प्रकरण ने यह संकेत दिया है कि फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से न केवल नियमों को दरकिनार किया जा रहा है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े कानूनों की भी खुली अवहेलना हो रही है। बोर खनन जैसे कार्य सीधे तौर पर भूजल स्तर को प्रभावित करते हैं, ऐसे में इस तरह की अनियमितता पर्यावरणीय दृष्टि से भी चिंताजनक है। एसडीएम प्रतिमा ठाकरे ने स्पष्ट किया है कि संबंधित पत्र पूरी तरह फर्जी है। उन्होंने कहा कि न तो उस पर कार्यालय की अधिकृत सील है और न ही हस्ताक्षर वैध हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
यह मामला प्रशासन के लिए एक चेतावनी भी है कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही यह भी आवश्यक है कि बोर खनन जैसे संवेदनशील मामलों में स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र को सक्रिय किया जाए। फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और क्या यह एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा है या व्यक्तिगत स्तर पर किया गया कृत्य।

User 1









