लंबित मांगों पर नहीं हुई सुनवाई, मंदिर हसौद में मिवान स्टील प्लांट के कर्मचारियों ने शुरू की हड़ताल



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पब्लिक स्वर,रायपुर। रायपुर के मंदिर हसौद स्थित मिवान स्टील प्लांट में कर्मचारियों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। लंबे समय से लंबित मांगों और प्रबंधन पर शोषण के आरोपों के बीच सैकड़ों कर्मचारियों ने काम बंद कर हड़ताल शुरू कर दी। कर्मचारियों ने प्लांट के सामने प्रदर्शन करते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल दिया जाएगा।

कर्मचारी संघ के अध्यक्ष बंटी मिश्रा ने आरोप लगाया कि कंपनी में श्रम कानूनों का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों से बंधुआ मजदूरों की तरह काम कराया जाता है, लेकिन उन्हें उनके अधिकार और सुविधाएं नहीं मिलतीं। कई बार आवेदन और शिकायत देने के बावजूद प्रबंधन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसके कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी में नियमित वेतन वृद्धि नहीं होती। वर्षों से काम कर रहे श्रमिकों को न तो अनुभव के आधार पर पदोन्नति मिलती है और न ही स्थायीकरण का लाभ। कर्मचारियों का आरोप है कि लंबे समय से काम करने के बावजूद उन्हें अस्थायी श्रमिक की तरह रखा जाता है।

कर्मचारियों की सबसे बड़ी शिकायत ओवरटाइम और छुट्टियों को लेकर है। उनका कहना है कि उनसे अलग-अलग बहाने बनाकर अतिरिक्त काम कराया जाता है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता। कर्मचारियों ने मांग की है कि ओवरटाइम का भुगतान डबल हाजिरी के आधार पर किया जाए। त्योहारों के दिन काम कराने पर दोगुना वेतन दिया जाए और हर महीने चार सवेतन अवकाश दिए जाएं।

कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें नियुक्ति पत्र और वेतन पर्ची तक नहीं दी जाती। कई श्रमिकों को बिना नोटिस और स्पष्ट कारण के काम से निकाल दिया जाता है। कर्मचारियों ने मांग की है कि पांच साल से अधिक समय से काम कर रहे कर्मचारियों को स्किल्ड श्रेणी में पदोन्नत किया जाए, जबकि दस साल से अधिक समय से कार्यरत कर्मचारियों को स्थायी किया जाए।

हड़ताली कर्मचारियों ने ईएसआई, पीएफ, बोनस, ग्रेच्युटी और सुरक्षा सुविधाओं की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि कंपनी में काम करने वाले कई कर्मचारियों को अब तक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। वहीं, भट्ठा और गर्म क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को हाई स्किल्ड श्रेणी में रखने और उन्हें विशेष सुविधाएं देने की मांग की गई है।

कर्मचारियों ने यह भी मांग की है कि भोजन का खर्च कंपनी उठाए और वेतन से कटौती न की जाए। इसके अलावा सभी कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण, कंपनी कार्ड और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। कर्मचारियों ने स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देने और कार्यस्थल आने-जाने के दौरान दुर्घटना होने पर मुआवजा देने की भी मांग की है।

श्रमिकों का कहना है कि यदि उनकी मांगों को जल्द नहीं माना गया तो प्लांट में उत्पादन पूरी तरह प्रभावित हो सकता है। कर्मचारियों ने साफ किया है कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं और प्रबंधन के खिलाफ उनका आंदोलन आगे और तेज होगा। अब देखना होगा कि कंपनी प्रबंधन कर्मचारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाता है और प्रशासन इस मामले में क्या हस्तक्षेप करता है।



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