पब्लिक स्वर,बीजापुर। बीजापुर जिले में वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां दुर्लभ वन्यजीव मालाबार जायंट स्क्विरल के शिकार के आरोप में वन विभाग ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने शिकार का वीडियो खुद ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अपलोड किया था, जो बाद में उसके खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बन गया।
वन विभाग की राज्य स्तरीय उड़नदस्ता टीम ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की जांच शुरू की। वीडियो में दुर्लभ मालाबार जायंट स्क्विरल के शिकार के दृश्य दिखाई दे रहे थे। तकनीकी जांच और स्थानीय स्तर पर जुटाई गई जानकारी के आधार पर टीम ने आरोपी की पहचान बीजापुर जिले के तोड़मा क्षेत्र निवासी के रूप में की और उसे गिरफ्तार कर लिया।
जानकारी के मुताबिक आरोपी द्वारा इंस्टाग्राम पर अपलोड किए गए वीडियो में करीब 9 मालाबार जायंट स्क्विरल नजर आ रहे हैं। वीडियो में इनके शिकार और प्रदर्शन से जुड़े दृश्य होने की बात सामने आई है। वन विभाग ने वीडियो को डिजिटल साक्ष्य के रूप में जब्त कर आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत मामला दर्ज किया है।
क्या है मालाबार जायंट स्क्विरल?
मालाबार जायंट स्क्विरल, जिसे भारतीय विशाल गिलहरी भी कहा जाता है, भारत के जंगलों में पाई जाने वाली एक दुर्लभ और आकर्षक प्रजाति है। इसका वैज्ञानिक नाम रैटुफा इंडिका (Ratufa indica) है। यह सामान्य गिलहरियों की तुलना में आकार में काफी बड़ी होती है और इसके शरीर पर गहरे भूरे, लाल, काले और क्रीम रंगों का मिश्रण दिखाई देता है।
यह प्रजाति आमतौर पर घने जंगलों और ऊंचे पेड़ों वाले क्षेत्रों में रहती है। पेड़ों पर रहने वाली यह गिलहरी जमीन पर बहुत कम उतरती है। वन विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रजाति जंगल के पारिस्थितिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह बीजों के प्रसार में भूमिका निभाती है।
अनुसूची-1 में शामिल है यह प्रजाति
मालाबार जायंट स्क्विरल वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजातियों में शामिल है। इसे अनुसूची-1 में रखा गया है, जो देश में सबसे अधिक संरक्षण पाने वाली वन्यजीव श्रेणी मानी जाती है। इसी श्रेणी में बाघ, तेंदुआ, हाथी और अन्य संवेदनशील वन्यजीव भी शामिल होते हैं।अनुसूची-1 के तहत आने वाले वन्यजीवों का शिकार करना गंभीर अपराध माना जाता है। दोषी पाए जाने पर आरोपी को तीन से सात साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
सोशल मीडिया बना सबूत
इस मामले ने एक बार फिर यह दिखाया है कि सोशल मीडिया पर अपलोड की गई सामग्री कई बार अपराधियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य बन जाती है। आरोपी ने संभवतः शिकार का वीडियो दिखावे या लोकप्रियता के उद्देश्य से अपलोड किया था, लेकिन वही वीडियो वन विभाग की कार्रवाई का आधार बन गया।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वन्यजीवों के शिकार, तस्करी या अवैध गतिविधियों से जुड़े वीडियो और तस्वीरों की लगातार निगरानी की जा रही है। ऐसे मामलों में डिजिटल ट्रैकिंग और तकनीकी जांच के जरिए आरोपियों तक पहुंचना अब पहले की तुलना में आसान हो गया है।
वन्यजीव संरक्षण को लेकर बढ़ी चिंता
बीजापुर और बस्तर संभाग के जंगल जैव विविधता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यहां कई दुर्लभ वन्यजीव और पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान, वन्यजीवों के महत्व की जानकारी और सख्त कानूनी कार्रवाई ही ऐसे मामलों को रोकने में मददगार साबित हो सकती है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं वन्यजीवों के शिकार, अवैध तस्करी या हिंसा से जुड़ी कोई जानकारी मिले तो तुरंत विभाग को सूचित करें।

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