रेलवे की सख्ती बेअसर? एक्सप्रेस ट्रेनों की पेंट्रीकार में पकता मिला खाना



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पब्लिक स्वर,बिलासपुर। सुरक्षा मानकों को लेकर सख्त निर्देशों के बावजूद एक्सप्रेस ट्रेनों की पेंट्रीकार में भोजन पकाने का मामला फिर सामने आया है। सोमवार को बिलासपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर खड़ी बिलासपुर-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस की पेंट्रीकार में खाना बनाते कर्मचारी पकड़े गए। इससे पहले एक दिन पूर्व छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस की पेंट्रीकार में भी इसी तरह का मामला उजागर हुआ था। रेलवे अधिकारियों ने मामले को गंभीर मानते हुए IRCTC के क्षेत्रीय प्रबंधक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।


क्या है पूरा मामला?

सोमवार दोपहर करीब 1:15 बजे राजधानी एक्सप्रेस की रैक प्लेटफॉर्म नंबर एक पर लगी थी। उसी दौरान कुछ मीडियाकर्मी पेंट्रीकार पहुंचे तो वहां तीन हीटर पर भगौने चढ़े हुए मिले। चावल-दाल पक रही थी, एक बर्तन में पानी उबल रहा था, जबकि उबले आलू, कटे हुए बैंगन और अन्य सब्जियां भी रखी थीं। पैकेट बंद रोटियां और अन्य खाद्य सामग्री भी मौजूद थी। मौके पर पेंट्रीकार के कर्मचारियों के साथ एक सुपरवाइजर/मैनेजर भी मौजूद था। सूचना मिलने पर सीसीआई मनोज साहा और स्टेशन मास्टर ओझा पहुंचे और जांच की। पूछताछ में कर्मचारियों ने बताया कि भोजन स्टाफ के लिए तैयार किया जा रहा था।


नियम क्या कहते हैं?

रेलवे बोर्ड ने सुरक्षा कारणों से एक्सप्रेस ट्रेनों की पेंट्रीकार में भोजन पकाने पर प्रतिबंध लगाया है। बीते वर्षों में गैस सिलेंडर से जुड़ी आगजनी की घटनाओं के बाद यह फैसला लिया गया था। नियमों के अनुसार:

पेंट्रीकार में केवल बेस किचन से तैयार भोजन ही चढ़ाया जा सकता है।

ट्रेन में खाना पकाने के लिए गैस सिलेंडर या हीटर का उपयोग प्रतिबंधित है।

सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।

इसके बावजूद लगातार दो ट्रेनों में खाना पकड़े जाने से सवाल खड़े हो रहे हैं।


जांच और कार्रवाई

रेलवे प्रशासन ने पहले छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के मामले में IRCTC को पत्र लिखकर जांच और नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा था। अब राजधानी एक्सप्रेस के मामले में भी स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।


बड़े सवाल

1. जब स्पष्ट प्रतिबंध लागू है, तो पेंट्रीकार में भोजन क्यों पकाया जा रहा है?

2. क्या निगरानी तंत्र में कहीं कमी है?

3. क्या स्टाफ भोजन के नाम पर नियमों की अनदेखी की जा रही है?


रेलवे की ओर से सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया जाता है, लेकिन लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से व्यवस्थाओं पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।



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